नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को संसद सत्रों की अवधि बढ़ाने की मांग की, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा हो सके और जनता के मुद्दों पर गंभीर बहस सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने प्रभावी कानून निर्माण के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहयोग बढाने तथा विपक्षी सांसदों की आवाज को सुनने की आवश्यकता पर बल दिया।
राज्यसभा में सदस्यों की विदाई के अवसर पर बोलते हुए खरगे ने सदन को और अधिक सार्थक बनाने की अपील करते हुए कहा कि अच्छा कानून बनाने में सत्ता पक्ष की ही नहीं, विपक्ष की भी बराबर की भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि हमें सहयोग की भावना से काम करना चाहिए, न कि नफरत की भावना से। उन्होंने प्रधानमंत्री से संसद सत्रों की अवधि बढ़ाने की मांग की, ताकि महत्वपूर्ण बिलों पर ज्यादा समय दिया जा सके और जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि गरीबों, कमजोर तबकों, किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर बात होनी चाहिए, लेकिन सत्ता पक्ष इसे अपनी आलोचना मानकर बिना सुने खंडन करने लगता है, जबकि सरकार को जनता की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
असंसदीय शब्दों के नाम पर भाषण के हिस्सों को सदन की कार्यवाही से हटाए जाने पर नाराजगी जताते हुए खरगे ने कहा कि कई बार उनके भाषण के अंश हटा दिए जाते हैं, जिससे उनका अर्थ बदल जाता है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर राज्यसभा की प्रक्रिया और नियमों की भी समीक्षा होनी चाहिए।
खरगे ने कहा कि राजनीति में रहने वाले लोग सार्वजनिक जीवन से कभी रिटायर नहीं होते और न ही देश सेवा के जज़्बे में थकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य दोबारा सदन में लौटेंगे, जबकि कुछ को यह अवसर नहीं मिल पाएगा, इसलिए आज का यह अवसर विशेष महत्व रखता है। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा कि "कहां से शुरू करें, कुछ समझ नहीं आता; आपकी विदाई के जिक्र से दिल भर आता।"
जनप्रतिनिधि के रूप में अपने 54 साल के राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि उन्होंने हमेशा सीखने की कोशिश की। राज्यसभा में विद्वान सांसदों के साथ काम करने से मिला अनुभव उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में अलग-अलग राज्यों से आए नेताओं, विभिन्न विचारधाराओं के लोगों और उनके अनुभवों से बहुत कुछ सीखने लायक रहता है। खरगे ने कहा कि अपने पूरे संसदीय जीवन में उन्होंने सदन में नियमित रूप से उपस्थित रहने और चर्चाओं में भाग लेने की पूरी कोशिश की। अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ सभी पक्षों की बातों को सुनना और अच्छी बातों को सीख कर व्यवहार में लाने का प्रयास वे लगातार करते रहे हैं।
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने कार्यकाल पूरा करने वाले कई प्रमुख सदस्यों के योगदान का जिक्र किया। शरद पवार के साथ दशकों पुराने अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई कि फिर से निर्वाचित होने पर वे दोबारा सदन का मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने तिरुची शिवा, दिग्विजय सिंह, केटीएस तुलसी, अभिषेक मनु सिंघवी, शक्ति सिंह गोहिल, नीरज डांगी, रजनी पाटिल, फूलो देवी नेताम, फौजिया खान, प्रियंका चतुर्वेदी और साकेत गोखले जैसे सदस्यों के योगदान की सराहना की।
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का उल्लेख करते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "वे प्रेम हमारे साथ किए, लेकिन शादी मोदी साहब के साथ।” उनका इशारा जेडी(एस) द्वारा कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा के साथ गठबंधन करने की ओर था। रामदास आठवले पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा कविता के जरिए प्रधानमंत्री मोदी का गुणगान करते हैं और अब छह साल का कार्यकाल दोबारा मिलने पर शायद थोड़ा कम करेंगे।
उन्होंने राज्यसभा उपसभापति हरिवंश की शालीनता और शिष्ट व्यवहार की भी प्रशंसा की। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि समय अपनी गति से चलता रहता है, संस्थाएं कायम रहती हैं और चेहरे बदलते रहते हैं। जो साथी दोबारा चुनकर आ रहे हैं और जो यहां से रिटायर होकर जा रहे हैं, वे सार्वजनिक जीवन में अपना योगदान जारी रखेंगे। अपने संबोधन के अंत में खरगे ने शायरी पढ़ी -"विदाई तो है दस्तूर जमाने का पुराना, पर जहां भी जाना अपनी छाप कुछ ऐसे छोड़ जाना कि हर कोई गुनगुनाए तुम्हारा ही तराना।"