रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले शिक्षकों और सरकार के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। राज्य में पड़ रही तेज गर्मी और लू के बीच शिक्षकों ने घर-घर जाकर जनगणना सर्वे कराने के फैसले पर नाराजगी जताई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि 40 से 45 डिग्री तापमान में फील्ड में काम करना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने इस मुद्दे को लेकर शासन के सामने आपत्ति दर्ज कराई है। संघ का कहना है कि जब प्रशासन आम लोगों को लू और गर्मी से बचने के लिए लगातार एडवाइजरी जारी कर रहा है तब शिक्षकों को कई घंटों तक धूप में घर-घर भेजना उचित नहीं है। शिक्षकों के मुताबिक, सर्वे के दौरान उन्हें लंबे समय तक पैदल चलना पड़ेगा। जिसकी वजह से हीट स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
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संघ ने सरकार से मांग की है कि या तो जनगणना के फील्ड सर्वे का समय बदला जाए या फिर इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही शिक्षक संगठन ने सुरक्षा के लिहाज से बड़ा प्रस्ताव भी रखा है। उनका कहना है कि यदि मौजूदा मौसम में शिक्षकों से यह कार्य कराया जाता है और किसी प्रकार की अनहोनी होती है तो प्रभावित शिक्षक के परिवार को एक करोड़ रुपये का बीमा कवर दिया जाना चाहिए।
वहीं, इस पूरे मामले पर गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की सेवा शर्तों में राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में योगदान देना पहले से शामिल है। उन्होंने कहा कि जनगणना देश से जुड़ा अहम कार्य है जिसे तय समयसीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है और इसमें लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।
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राज्य में 16 अप्रैल से सेल्फ गणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जबकि, 1 मई से जनगणना का डोर-टू-डोर सर्वे शुरू होना है। प्रशासन इसे जरूरी राष्ट्रीय प्रक्रिया बता रहा है। जबकि, शिक्षक संगठन मानवीय आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार गर्मी को देखते हुए कार्य के समय या व्यवस्था में कोई बदलाव करती है या नहीं।