नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) भी आंदोलन की तैयारी में है। किसान संगठन ने 3 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक देशभर में ग्राम महापंचायतें आयोजित करने का फैसला किया है। इन बैठकों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा। साथ ही किसानों की लंबित मांगों पर चर्चा कर 26 नवंबर से प्रस्तावित किसान आंदोलन को तेज करने की रणनीति बनाई जाएगी।

ऑल इंडिया किसान सभा के नेता और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य पी. कृष्णप्रसाद ने कहा कि चुनावी अधिकारों की लड़ाई केवल राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे गांवों और कारखानों तक ले जाकर व्यापक जन आंदोलन में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसान संगठन ग्राम महापंचायतों में एसआईआर के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाएगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने ग्राम महापंचायतों में पारित किए जाने के लिए तीन प्रस्ताव रखे हैं। इनमें केंद्र सरकार द्वारा 9 दिसंबर 2021 को किसान संगठनों को दिए गए लिखित आश्वासन को लागू करना, 2020-21 के किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों की याद में सिंघु बॉर्डर पर स्मारक बनाना और एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की मांग शामिल है।

कृष्णप्रसाद ने कहा कि निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी नागरिकों के मतदान के अधिकार को सुनिश्चित करना है, लेकिन अब मतदाताओं के अधिकारों पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके मुताबिक, इस मुद्दे को गांवों और कारखानों तक ले जाकर व्यापक जन आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी रही है। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों और प्रक्रिया को लेकर संगठन के दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों से अलग समझना जरूरी है।

ग्राम महापंचायतों में एसआईआर के अलावा किसानों की पुरानी मांगों पर भी चर्चा होगी। संयुक्त किसान मोर्चा सभी फसलों की सुनिश्चित खरीद के साथ सी2 लागत पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, किसानों की व्यापक कर्जमाफी, बिजली के निजीकरण से जुड़े कदम वापस लेने और भूमि अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहा है। संगठन की मांगों में 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों और खेतिहर मजदूरों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने तथा चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने की मांग भी शामिल है।

संयुक्त किसान मोर्चा 12 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में अपनी राष्ट्रीय परिषद और आम सभा की बैठक आयोजित करेगा। इसमें किसान आंदोलन की आगे की दिशा और 26 नवंबर से प्रस्तावित आंदोलन को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा होगी।

ग्राम महापंचायतों के जरिए संगठन गांवों में आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने और उसे जारी रखने के लिए जरूरी संसाधन तैयार करने की योजना बना रहा है। तीन अक्टूबर को महापंचायतों की शुरुआत के साथ संगठन लखीमपुर खीरी शहीद दिवस भी मनाएगा। वर्ष 2021 में किसान आंदोलन के दौरान लखीमपुर खीरी में चार प्रदर्शनकारी किसानों और पत्रकार रमन कश्यप की मौत हुई थी।