दतिया में पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों का ही भरोसा नहीं टूटा बल्कि जिला प्रशासन भी भरोसे में मारा गया। लंबे इंतजार के बाद जब बीजेपी ने दतिया उप चुनाव के लिए टिकट घोषित किया तो सब हैरान रह गए। दतिया से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया था। ऐसा होने के कयास लगाए जा रहे थे मगर नरोत्तम मिश्रा और उनके खेमे की गले-गले तक विश्वास था कि टिकट मिश्रा को ही मिलेगा। इसी भरोसे के दम पर नरोत्तम मिश्रा के समर्थन मे प्रचार भी शुरू हो गया था और नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया गया था।
टिकट नहीं मिला तो नरोत्तम मिश्रा के समर्थक भड़क गए। करीब 3000 समर्थकों की भीड़ ने 11 घंटे हाईवे जाम रखा। नाराज कार्यकर्ताओं को हटाने आए एसपी-कलेक्टर समेत पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। हिंसा में एसपी मयूर खंडेलवाल, एसडीओपी पूनमचंद यादव, अतरेंटा टीआई नरेंद्र सिंह राजपूत समेत 8 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस को वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
नरोत्तम मिश्रा के पक्ष में ऐसा माहौल बनाया गया था कि टिकट न मिलने की किसी को अंदेशा न था। प्रशासन ऐसे प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं था। जाम का असर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी हुआ। और इस कारण प्रदेश की कानून व्यवस्था की आलोचना ज्यादा हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ जिसमें कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे भी हमले का शिकार हुए। इसके बाद प्रशासन खास कर कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े की क्षमताओं पर सवाल उठ रहा है। कांग्रेस ने मांग ही कर डाली कि वर्तमान प्रशासनिक अधिकारी निष्पक्ष चुनाव करवाने में समर्थ नहीं है। अधिकारियों को बदला जाना चाहिए। साफ है कि प्रशासन स्थानीय रूप से ताकतवर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के भरोसे में रह गया और पुलिस पिट गई।
एक अफसर से नाराज छह मंत्री
किसी एक अफसर खिलाफ ऐसी लामबंदी कम ही देखी जाती है जब छह-छह मंत्री एक अधिकारी पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री से मिले हों। इस बार ऐसा हुआ है। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की जाति प्रमाण पत्र के गलत होने के आरोपों की जांच जारी है। बीते सप्ताह इस मामले में सतना कलेक्टर सतीश कुमार ने गांवों में मुनादी करवाई थी। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने इस प्रक्रिया को अपना अपमान माना है। मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा है कि पहली बार किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस तरह मुनादी कराई गई। ऐसा तो किसी अपराधियों के मामले में होता है। मैं अपराधी नहीं हूं फिर मुनादी कराने की क्या जरूरत थी?
मंत्री की इस पीड़ा से सहमति जताते हुए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, लखन पटेल और राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है। मंत्रियों ने कहा कि पहले भी कई जाति प्रमाण पत्र मामलों की जांच हुई है, लेकिन इस तरह ढोल पिटवाकर सूचना देने की परंपरा कभी नहीं रही। मंत्रियों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई जनजातीय कार्य विभाग के टीआरआई के एक अधिकारी के निर्देश पर कराई गई।
मंत्रियों की इस आपत्ति और सीएम मोहन यादव से मुलाकात पर शिकायतकर्ता कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने जांच प्रक्रिया पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है। जांच समिति ने आदेश दिया और कलेक्टर ने आदेश का पालन किया था। अभी जांच जारी है, इस बीच अधिकारी को दोषी बताते हुए सीएम से शिकायत करना प्रशासनिक प्रक्रिया पर दबाव डालने के राजनीतिक दांव की तरह है। यदि जांच समिति ने किसी दबाव में फैसला दिया और वह मंत्री प्रतिमा बागरी के पक्ष में हुआ तो कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी।
एमपी में करप्शन की रेट लिस्ट, सब इंजीनियर का 5 परसेंट, सीईओ का 3 परसेंट कमीशन
मध्य प्रदेश में करप्शन की रेट लिस्ट चर्चा में है। इस सिस्टम के ही एक अंग सब इंजीनियर ने यह पोल खोली है। सतना में जनपद पंचायत मझगवां के सब इंजीनियर फील्ड पर बंदूक लेकर गए थे। वीडियो वायरल हुआ तो सस्पेंड हो गए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीश समेले ने कहा कि 20 सालों से लगातार मैं बंदूक साथ लेकर चलता हूं। इसका मुख्य कारण परिवार की दुश्मन हैं। इसके बाद सब इंजीनियर ने जिला पंचायत सीईओ पर कमीशनखोरी के आरोप लगाते हुए कहा कि जिला पंचायत सीईओ खुद धमकी देकर पंचायत से प्रतिदिन 10 से 20 हजार रुपए मंगाते हैं। हमेशा सब इंजीनियर से चंदा वसूली करते हैं। हर पद पर कमीशन तय है। 10 पर्सेंट कमीशन सरपंच, 5 पर्सेंट सचिव, 3 पर्सेंट रोजगार सहायक तक जाता है। सब इंजीनियर 5 पर्सेंट, असिस्टेंट इंजीनियर 2 से 3 पर्सेंट, जनपद सीईओ का 3 पर्सेंट। इस तरह से पूरे सिस्टम में डिस्ट्रीब्यूशन होता है। ग्राम पंचायत से वल्लभ भवन तक कोई माई का लाल नहीं है जो कहे कि उसने कमीशन नहीं लिया है। हर संविदा इंजीनियर की संविदा वृद्धि के लिए प्रतिवर्ष 40 हजार रुपए लिया जाता है। इसमें पूरा तंत्र ऊपर से लेकर नीचे तक मिला हुआ।
कहा जा रहा है कि सब इंजीनियर को सस्पेंड किया गया तो उसने आक्रोश में यह पोल खोल दी। यह संभव है कि सब इंजीनियर ने सस्पेंड होने के बाद आक्रोश में वीडियो जारी कर दिया हो लेकिन वीडियो में कही गई करप्शन की बातों और उसके परसेंट पर खामोशी है।
बीजेपी को नुकसान कर रहा है अफसर, बदल दो
मंत्री गोपाल भार्गव का एक पत्र वायरल हो रहा है। प्रभारी सहायक आयुक्त, आबकारी जिला ग्वालियर राकेश कुमार कुर्मी की शिकायत करते हुए गोपाल भार्गव ने पत्र में लिखा है कि राकेश कुमार कुर्मी मूलतः मेरे विधानसभा क्षेत्र रहली के निवासी हैं। विधानसभा चुनाव 2023 में राकेश कुमार कुर्मी तथा उनके परिवार ने मेरे खिलाफ चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार किया, जातिगत विद्वेष फैलाया एवं विभिन्न प्रकार के षड्यंत्र रचे। अपनी मैदानी पोस्टिंग में पदस्थ रहते हुए तथा पद का दुरूपयोग करते हुए उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए शराब और पैसे की मदद की जिससे मेरे और बीजेपी के खिलाफ माहौल बना। मेरा मानना है कि पार्टी तथा सरकार के खिलाफ प्रचार करने, षड्यंत्र रचने और पद का दुरूपयोग करने वाले अधिकारी का फील्ड में पोस्टेड रहना पार्टी तथा सरकार दोनों के लिए हानिकारक है। मेरा अनुरोध है कि आगामी विधानसभा चुनाव तक राकेश कुर्मी को मैदानी पोस्टिंग से पृथक रखे जाने के लिए निर्देश प्रदान करें।
गोपाल भार्गव सबसे ज्यादा 9 बार जीतने वाले नेता है। वे भी एक अधिकारी को लेकर राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं। इस पत्र के वायरल होने के बाद कुर्मी समाज के प्रतिनिधियों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी है कि एक ताकतवर विधायक एक अफसर को लेकर इतना आक्रामक क्यों हैं? उन्हें किस बात का डर है?