मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पास हो गया है। अब इसे लेकर सियासी गतिविधियां सदन के बाहर होंगी। मगर, सदन के अंदर जो हुआ वह भी एक खास रणनीति के तहत हुआ और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। यूसीसी बिल को पास करवाने के लिए सरकार की रणनीति का खुलासा बीजेपी विधायक दल की बैठक में खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने किया था। उन्होंने बीजेपी विधायकों से कहा था कि यूसीसी के प्रावधानों को लेकर विपक्ष कई तरह की बातें करेगा। हमें जय श्री राम का नारा लगा कर उनका जवाब देना है। इसके साथ ही बीजेपी विधायकों को जनता के बीच जा कर यूसीसी के प्रावधानों और उसके लाभों की जानकारी देने को कहा गया है। 

मंगलवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वही किया जो उन्होंने विधायक दल बैठक में कहा था। विधानसभा में यूसीसी पर चर्चा के लिए दो घंटे का समय तय किया गया था। इस दो घंटे के दौरान विपक्ष अपने मुद्दे पर भटकता नजर आया जबकि सत्ता पक्ष ने एक ही सूत्र अपना रखा था कि कांग्रेस जितना विरोध करे उसका जवाब उससे तेज आवाज और तरीके से दो। विधानसभा में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन् के बीच जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोलने के लिए खड़े हुए तो उनका व्यवहार अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह नहीं था। उन्होंने सभा की तरह नारे लगा कर अपनी बात शुरू की। जैसा विधायक दल की बैठक में कहा गया था, विपक्ष के विरोध के जवाब में जय श्री राम का नारे लगाए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के तेवर देख कर अन्य मंत्रियों और विधायकों ने भी यही अंदाज अपनाया और विपक्ष का विरोध सत्ता पक्ष के हंगामे के आगे छोटा बन कर रह गया। 

राजनीतिक आकलन यह भी है कि दो घंटे की चर्चा का जितना बेहतर उपयोग कांग्रेस कर सकती थी वह हुआ नहीं। बीजेपी ने हंगामे में अपनी ओर से नारे जोड़ कर शोर बढा दिया मगर विधेयक पर गंभीर चर्चा का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया। अब सड़क पर भी यही दिखाई देगा। जब सदन में चर्चा नहीं हुई तो सड़क पर चर्चा और विमर्श की बात तो दूर की कौड़ी है। बाहर भी वही रणनीति अपनाई जाएगी जो सदन में अपनाई गई।

कांग्रेस विधायक की नाराजगी में छिपा सक्सेस फंडा

विधानसभा में यूसीसी पर विपक्ष में अनुशासन, रणनीति और एकता की कमी दिखाई दी है तो अब कांग्रेस के सामने अपनी बात को जनता के बीच ले जाकर जनमत बनाने का मौका है। दिल्ली में मासूम छात्रों की बेरहमी से पिटाई और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस को बीजेपी सरकार को मौका मिल गया है। देशभर में जारी आंदोलन के साथ भोपाल में भी कांग्रेस सड़क पर उतर आई। नीट परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में धरना दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में राजभवन के सामने प्रदर्शन किया। देर रात को पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। 

सड़क पर ये मुद्दे कांग्रेस को नई ताकत दे सकते हैं। ऐसे में सुसनेर से कांग्रेस विधायक भैरोंसिंह परिहार की सलाह कारगर हो सकती है। सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जताते हुए भैरोंसिंह परिहार ने कहा है कि मध्य प्रदेश की जनता बीजेपी से प्रताड़ित है और कांग्रेस की ओर देख रही है। विधायक भैरोसिंह परिहार का मानना है कि कांग्रेस में अंतर्कलह है और यह सब खराब कर रहा है। युवाओं के रोजगार और बुजुर्गों की रुकी हुई पेंशन जैसे जनहित के मुद्दों के बावजूद, कांग्रेस नेतृत्व जमीनी हकीकत से दूर नजर आ रहा है। 

कांग्रेस विधायक ने यह सलाह ऐसे समय दी है जब कांग्रेस अलग-अलग मंचों से जनता के मुद्दे उठाने के जतन कर रही है। विधानसभा सत्र के पहले भी जनता से उन मुद्दों को जानने के जतन किए गए जो जनता को परेशान कर रहे हैं। इस तरह कांग्रेस सदन में वास्तविक मैदानी स्थिति को दिखाना चाहती थी। इसी क्रम में सुसनेर विधायक भैरोसिंह परिहार चाहते हैं कि संगठन को अपने विधायकों की आवाज भी सुनना चाहिए।

सिंधिया समर्थक मंत्री जी की पीड़ा क्या है?

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का मंगलवार-बुधवार रात हुआ फेसबुक लाइव चर्चा में आ गया। मंगलवार को विधानसभा में यूसीसी बिल पास हुआ। नीट पेपर लीक और विद्यार्थियों की पिटाई के बाद कांग्रेस विधायक सदन में तथा राजभवन पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह का फेसबुक लाइव करना उत्सुकता जगा गया। मंत्री क्या कहने वाले हैं, यह जानने की उत्सुकता में कई लोगा फटाफट लाइव से जुड़ गए। मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने सीताराम, सीताराम जप करना शुरू कर दिया। लोग कुछ देर इंतजार करते रहे कि मंत्री प्रद्युम्न सिंह कुछ ओर बात कहेंगे लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं। वे केवल जप करते रहे।    

रात का समय था और मंत्री प्रद्युम्न सिंह केजुअल वेशभूषा में थे। उनके बाल भी बिखरे-बिखरे थे। लोगों ने महसूस किया कि पिछले कुछ समय से परेशान चले रहे मंत्री किसी पीड़ा में हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र गुना से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने कुछ दिनों पहले ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के काम करने के तौर-तरीकों पर कटाक्ष करते हुए कड़वी बातें कही थीं। विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा था कि हमारे प्रदेश के ऊर्जा मंत्री इतने बड़े ज्ञानी हैं कि वे जनता को गुमराह करने के लिए सीधे मंच पर ही दंडवत प्रणाम करने लगते हैं। कभी लोकप्रियता हासिल करने के लिए वे बिजली के खंभों पर चढ़ जाते हैं, तो कभी सफाई का ढोंग रचने के लिए गंदी नालियों में उतर जाते हैं। सरकार की छवि को धूमिल करने वाले और जनता को परेशान करने वाले ऐसे नाकारा मंत्रियों को तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। 

माना जा रहा है कि घर में मिल रही चुनौती से मंत्री प्रद्युम्न सिंह परेशान चल रहे हैं और 16 मिनट के लाइव में कुछ भी न कह कर केवल सीताराम का जाप करना उनकी मनोभावों को व्यक्त करता है। 

मंत्री के गिलास में शराब नहीं है!

जाति प्रमाण पत्र की जांच को लेकर चर्चा में आई राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट मिल गई है। वे आरक्षित वर्ग से ही हैं। इस सफलता के बाद प्रतिमा बागरी ने फेसबुक लाइव किया और उसका वीडियो जारी किया। यह वीडियो नए विवाद का कारण बन गया।  

फर्जी जाति प्रमाण पत्र विवाद में क्लीन चिट मिलने के बाद फेसबुक लाइव करते हुए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने सामने तीन अलग-अलग गिलास रखे। इन गिलासों में चाय, कॉफी और ग्रीन टी भरी हुई थी। इन तीन गिलासों के जरिए उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि दूर से देखने पर अक्सर सच ठीक से दिखाई नहीं देता। उनका तर्क था कि अगर चाय को शराब के गिलास में रख दिया जाए, तो वह चाय ही रहती है, शराब नहीं बन जाती। 

इस लाइव में प्रतिभा बागरी ने ब्राह्मण और ठाकुर समाज से जुड़ी छुआछूत वाली बात पर उपजे विवाद को भी शांत करने का प्रयास किया। उनके इस बयान पर ब्राह्मण व ठाकुर समाज ने विरोध प्रदर्शन किया था। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के इस तरीके पर पक्ष-विपक्ष में कमेंट हो रहे हैं।