रीवा बाढ़ में डूब रहा है। शासन-प्रशासन डूब प्रभावितों को राहत देने में जुटा है, इसी बीच कलेक्टर की कुर्सी का किस्सा पानी की तरह हिलोर मारता रहा है। हुआ यूँ कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जब बाढ़ राहत कार्यों को देखने के लिए रीवा पहुंचे तो तुरंत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समीक्षा बैठक के दौरान बीजेपी नेताओं को तो कुर्सियां मिल गई लेकिन कलेक्टर-निगम आयुक्त कोने में खड़े रहे। यह तस्वीर वायरल हुई तो सोशल मीडिया पर कई तरह के कमेंट आने लगे। लोगों ने आपत्ति जताई कि कलेक्टर को खड़ा रखा गया जबकि भाजपा के जिला अध्यक्ष जैसे नेताओं को मुख्यमंत्री के बराबर कुर्सी दे दी गई।
एक पोस्ट में कहा गया कि बीजेपी के विधायक, मंत्री, पूर्व विधायक, नगर निगम अध्यक्ष और बीजेपी जिला अध्यक्ष, सबके लिए कुर्सियां लगी लेकिन रीवा जिले के कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर, दोनों आईएएस अधिकारी, उसी कार्यक्रम में खड़े दिखाई दे रहे हैं। सवाल किसी व्यक्ति की कुर्सी का नहीं, संवैधानिक संस्थाओं और प्रशासनिक पदों के सम्मान का है। जनप्रतिनिधियों का सम्मान होना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन क्या प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारियों को सम्मानजनक बैठने की जगह देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं है? क्या कुर्सियां भी अब राजनीतिक हैसियत देखकर तय होंगी? यह तस्वीर केवल दो अधिकारियों के खड़े होने की नहीं, बल्कि प्रशासनिक मर्यादा, संस्थागत सम्मान और लोकतांत्रिक संतुलन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
इस नाराजगी और आक्रोश के बीच सोशल मीडिया पर दूसरी तस्वीर भी वायरल हुई जिसमें लोगों ने एआई की मदद से कलेक्टर को मुख्यमंत्री के साथ बैठक में बैठे हुए बता दिया। अफसर को सम्मान देने का यह तरीका भी चर्चा में रहा। रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और कुर्सी का किस्सा नया नहीं है। इसके पहले स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रीवा में एक ऐसी पहल देखने को मिली, जिसने सभी का ध्यान खींचा। तब रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने अपने स्टेनो से ध्वजारोहण करवाया था। इसके पहले पद संभालने के बाद जब वे जनता के बीच पहुंचे थे कुर्सी पर नहीं जमीन पर बैठ कर जन समस्याएं सुनी थीं। उनके इन कार्यों का लोगों ने सराहा। सीएम की मीटिंग में खड़े अफसरों को एआई की मदद से कुर्सी देना इस सराहना से उपजा कार्य माना जा रहा है।
अफसर देंगे मंत्रियों के काम का फीसबैक, चुनाव की चिंता में चिंतन
मोहन सरकार अपने ढ़ाई साल के कार्यकाल में पहली बार चिंतन शिविर आयोजित करने जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रियों के साथ चिंतन शिविर जरूर आयोजित करते थे लेकिन बीते लगभग तीन सालों में मोहन सरकार ने यह आयोजन नहीं किया। अब जब चिंतन शिविर के आयोजन का निर्णय हुआ है तो तय किया गया है कि यह आयोजन भोपाल में ही होगा जबकि शिवराज इसे भोपाल के बाहर किया करते थे। तैयारी है कि सितंबर में सीएम डॉ. मोहन यादव सभी मंत्रियों के साथ दो दिनों तक चिंतन-मंथन करेंगे। खास बात यह है कि चिंतन शिविर के दौरान कलेक्टर-कमिश्नर और एसीएस, पीएस भी मौजूद रहेंगे। ये अफसर मंत्रियों के कामकाज पर मैदानी फीडबैक देंगे। कयास है कि इस चिंतन के बाद मंत्रियों के कामकाज में चुनाव की दृष्टि से फेरबदल हो।
सवाल पूछा तो आईएफएस को याद आए दिमागी नक्सली
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के डायरेक्टर और वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी उत्तम कुमार शर्मा की एक पोस्ट ने विवाद खडा कर दिया है। आईएफएस ने सवाल पूछने वालों को ‘दिमागी नक्सल’ करार दिया है। वही शब्द है, जिसका इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से 15 अगस्त के अपने भाषण में किया था। आईएफएस ने एक पोस्ट में लिखा है: ‘वन्यजीवों की सुरक्षा में लगे सभी वनकर्मियों के लिए एक जरूरी सलाह है। हर कोई जो वन्यजीवों की मदद करने का दावा करता है, जरूरी नहीं कि वह जमीनी हकीकत को समझता हो या उसके मकसद भी नेक हों। इसलिए किसी भी तरह की जानकारी साझा न करें। हर जगह ‘दिमागी नक्सल’ मौजूद हैं, हमें इन्हीं से निपटना है। सतर्क रहें।’
यह बात उन्होंने तेंदुए के शिकार और खाल तस्करी की घटना के बाद कही। कूनो नेशनल पार्क के डायरेक्टर आईएफएस उत्तम कुमार शर्मा ने एक्स पर तेंदुए के शिकार से जुड़ी खबर शेयर कर यह संकेत दिया था कि इस खबर के सामने आने के पीछे एक एनजीओ की भूमिका थी। इसके चलते उन्होंने 'वनकर्मियों को बाहरी लोगों या खुद को वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट बताने वालों के साथ गोपनीय जानकारी शेयर न करने की हिदायत दी। यानी वन्य जीवों के साथ घटनाएं रूके न रूके, जानकारियां बाहर नहीं आनी चाहिए।
10 आईएएस भी नहीं सुधार पाए शिक्षा
केंद्र की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के स्कूलों की रैंकिंग खराब आना और अपने स्कूलों की समस्याओं को लेकर बच्चों का सड़कों पर उतर जाना बदहाल शिक्षा व्यवस्था की गवाही है। मध्य प्रदेश का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला सीधी जिला महज 333 अंक यानी सिर्फ 55.5 प्रतिशत ही हासिल कर सका है। मध्य प्रदेश का सबसे बेस्ट जिला भी देश के टॉप जिलों से पूरे 100 अंक पीछे छूटकर इस रेस से पूरी तरह बाहर हो गया है। प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में जारी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है।
डबास ने स्कूल भवन मरम्मत घोटाला, किताबों की छपाई में देरी, यूनिफॉर्म टेंडर विवाद, अत्यधिक दरों चपाती मेकर मशीन खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। आजाद सिंह डबास ने कहा कि शिक्षा विभाग में 10 से अधिक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तैनात हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दबाव का आवरण ओढ़कर अधिकारी स्वयं ऐसे फैसलों में शामिल होते हैं। यदि समय रहते इन मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकार में चला जाएगा।