कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सोमवार की रात भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुई। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो स्थित स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में भारतीय पैरा एथलीट शर्मीला धनकर ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके इस प्रदर्शन के सामने कोई भी प्रतिद्वंद्वी नहीं टिक सका और इसी के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक दर्ज हो गया। इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला को भी कांस्य पदक मिला। जिससे भारत ने एक ही इवेंट में दो पदक जीतने का गौरव हासिल किया।

शर्मीला धनकर की यह उपलब्धि कई मायनों में खास रही। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पैरा एथलेटिक्स में 20 साल बाद कोई पदक मिला है। साथ ही वह इस प्रतियोगिता की पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी और पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उनकी जीत के बाद ग्लास्गो में भारतीय राष्ट्रगान भी गूंजा।

मुकाबले में शर्मीला ने शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा था। पहले प्रयास में उन्होंने 9.48 मीटर का थ्रो कर बढ़त बनाई और फिर 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट प्रदर्शन करते हुए बाकी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। F57 वर्ग में खिलाड़ी बैठकर शॉट पुट करते हैं। इसमें ऊपरी शरीर की ताकत, संतुलन और सटीक तकनीक अहम भूमिका निभाती है। पूरे मुकाबले के दौरान शर्मीला ने निरंतरता और बेहतरीन नियंत्रण का प्रदर्शन किया।

भारत की दूसरी खिलाड़ी शिल्पा के. शायला शुरुआत में चौथे स्थान पर थी। हालांकि, प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद नाइजीरिया की यूकारिया इयियाजी के पहले प्रयास को भी अमान्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनके नाम कोई वैध थ्रो नहीं बचा। जिससे शिल्पा तीसरे स्थान पर पहुंच गई और उन्हें कांस्य पदक प्रदान किया गया। इस तरह भारत ने महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक जीतकर डबल पोडियम फिनिश दर्ज की।

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की 40 वर्षीय शर्मीला धनकर का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने आर्थिक तंगी में बचपन बिताया और खेल में आगे बढ़ने के लिए परिवार का घर तक बेचना पड़ा। निजी जीवन की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। पैरा खेलों से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया और कोचों के मार्गदर्शन में लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।

शर्मीला इससे पहले भी कई बड़ी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। इस साल दुबई में आयोजित फज्जा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने शॉट पुट में स्वर्ण और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीता था। राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 9.52 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया था। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स और हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में वह चौथे स्थान पर रही थी। जबकि, विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पांचवें स्थान पर रहकर पदक से चूक गई थी। ग्लास्गो में मिला यह स्वर्ण उनके लंबे संघर्ष, धैर्य और लगातार की गई मेहनत का सबसे बड़ा पुरस्कार है।