भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब जब 32 से ज्यादा जिंदगियां निगल चुकी है। वहीं, 11 लोग आईसीयू में और करीब पांच दर्जन लोग अस्पतालों में ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने मोहन सरकार के प्रशासनिक तंत्र की कलई खोल दी है। चौतरफा आलोचना के बाद राज्य सरकार ने संभागीय आयुक्त और कमिश्नर के तबादले कर दिए हैं। हालांकि, विपक्षी दल माकपा ने इस कार्रवाई को शराब माफियाओं और मुख्य अपराधियों को बचाने की कवायद करार दिया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा है कि जब हर स्तर पर अपराधियों को बचाने की कोशिश हो रही है तो फिर मृतकों और पीड़ित परिजनों को न्याय कैसे मिलेगा? मौत के इस तांडव से एक दिन पहले ही शराब को क्लीनचिट देने वाले अधिकारियों पर चुप्पी क्यों है? अब तो नकली शराब का पूरा गोरखधंधा उजागर हो चुका है। मगर पुलिस अधीक्षक का जहरीली शराब के ललितपुर से सप्लाई होने का दावा करना क्या शराब माफियाओं को बचाने की कोशिश नहीं थी? वह भी तब जब अदावन गांव के बृजेश महाराज कच्ची शराब को उतारे जाने और बेचे जाने के सीसीटीवी फुटेज एसडीओपी और पुलिस अधीक्षक को दे चुके थे।
जसविंदर सिंह ने कहा कि शराब माफियाओं को प्रशासन के संरक्षण का ही परिणाम था कि अपराधियों ने बृजेश महाराज के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए थे और पुलिस में उसके खिलाफ़ झूठी कार्रवाई कर मुकदमा भी दर्ज करवा दिया था। माकपा नेता ने कहा कि आबकारी आयुक्त के उज्जैन कनेक्शन भी संदेह पैदा करते हैं। घटना के दिन घटना स्थल पर मौजूद होने के बावजूद उन्होंने जिस प्रकार सोशल मीडिया और अखबारों का हवाला देकर आबकारी विभाग के अधिकारियों को सस्पेंड किया है, उससे साफ है कि वे अपराधियों को बचाने की ही कोशिश है। उज्जैन कनेक्शन होने के चलते वे भी निश्चिंत हैं।
माकपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दौरा कर संभागीय आयुक्त और आईजी पुलिस को बदल दिया है, लेकिन पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर अभी भी जमे हुए हैं बावजूद इसके कि संदेह के घेरे में वही सबसे अधिक हैं। मुरैना में भी जहरीली शराब से हुई 24 मौतों के बाद इसी पुलिस अधीक्षक को हटा दिया गया था। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि सरकार और प्रशासन की अभी तक की कार्यवाहियों से शराब माफियाओं से प्रशासन की सांठगांठ और इसे राजनीतिक संरक्षण साफ दिखाई देता है। जिसकी निंदा भी की जानी चाहिए और ज़न प्रतिरोध भी होना चाहिए।