भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कई दिनों से चल रहे एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन खत्म हो गया है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर काम बंद कर चुके इंटर्न्स और सरकार के बीच सहमति बन गई है। मंत्रालय में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की मौजूदगी में करीब डेढ़ घंटे चली बैठक के बाद इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 21,500 रुपए तय करने पर सहमति बनी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव से चर्चा के बाद सरकार ने राशि बढ़ाने का फैसला लिया।

बैठक में इंटर्न डॉक्टरों के अलावा जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MTA) के प्रतिनिधि भी शामिल रहे थे। चर्चा के दौरान स्टाइपेंड के साथ आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के उपचार से जुड़े मुद्दों पर भी बात हुई। सहमति बनने के बाद आंदोलन खत्म करने का रास्ता साफ हो गया।

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दरअसल सरकार की ओर से शुरुआत में इंटर्न डॉक्टरों के लिए 18,500 रुपए मासिक स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव रखा गया था। इंटर्न्स ने इसे स्वीकार नहीं किया और अपनी मांग पर कायम रहे। बातचीत आगे बढ़ने के बाद प्रस्तावित राशि में बढ़ोतरी की गई और आखिरकार 21,500 रुपए पर सहमति बनी।

इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी प्रतिनिधियों ने सवाल उठाए थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दोषी पाए गए दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया जा चुका है। मामले की विस्तृत जांच के लिए अलग टीम बनाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को बेहतर और समुचित इलाज उपलब्ध कराने का आश्वासन भी सरकार की ओर से दिया गया। डॉक्टर प्रतिनिधियों ने छात्रों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सरकार के रुख का स्वागत किया।

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बैठक के बाद JUDA और MTA प्रतिनिधियों ने सरकार के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के फैसले के साथ पुलिस कार्रवाई की जांच और घायल छात्रों के इलाज के आश्वासन पर संतोष जताया। प्रतिनिधियों ने समाधान निकालने के लिए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का आभार भी व्यक्त किया।

एमबीबीएस इंटर्न्स लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि मौजूदा राशि काम के दबाव और बढ़ती महंगाई के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। मांग पूरी नहीं होने पर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। आंदोलन का असर अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ने लगा था।

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विवाद उस समय और बढ़ गया जब गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न्स मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकल गए। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के आगे बढ़ने पर अड़े रहने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद डॉक्टरों और छात्रों का आक्रोश बढ़ गया था और आंदोलन तेज हो गया था।