UPI से भुगतान करने पर दुकानदारों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने की योजना फिलहाल टाल दी गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार 13 अक्टूबर को बताया कि चुनिंदा पर्सन टू मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। इसकी नई तारीख अलग से घोषित होगी। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की योजना थी। त्योहारों के दौरान व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े इसलिए यह फैसला लिया गया है। फिलहाल दुकानदारों के लिए UPI भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क लागू नहीं होगा।

NPCI के अनुसार, UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित व्यवस्था में चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत तक MDR शुल्क लगाया जाना है। यह शुल्क ग्राहकों के बजाय व्यापारियों को देना होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।

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देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और UPI सेवाओं को मुफ्त बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने चार वित्तीय वर्षों में 8,276 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसके तहत छोटे व्यापारियों को 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर 0.15 प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाता था। 

वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच वित्तीय संस्थानों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुल 8,276 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन दिए गए। इसका उद्देश्य रोजमर्रा के डिजिटल लेनदेन को सुचारु बनाए रखना और आम यूजर्स के लिए भुगतान की सुविधा को बिना अतिरिक्त शुल्क के जारी रखना था। सरकारी प्रोत्साहन और डिजिटल भुगतान के विस्तार के बीच UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जून 2026 तक देश में लगभग 55.5 करोड़ सक्रिय UPI यूजर्स थे।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने UPI पर शुल्क लगाने को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आती है तो छोटे दुकानदार दोबारा नकद लेनदेन को प्राथमिकता दे सकते हैं। ऐसे में UPI को मुफ्त बनाए रखना जरूरी है। छोटे व्यापारियों के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करने से नकदी संभालने की जरूरत कम होती है और ग्राहकों को भी आसानी रहती है। हालांकि, MDR लागू होने पर व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। इसका वास्तविक असर शुल्क की अंतिम दर और लागू होने वाली शर्तों पर निर्भर करेगा।

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पेमेंट्स प्लेटफॉर्म PB Pay के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्ष वर्धन मस्ता के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड से किए गए लेनदेन पर MDR आमतौर पर 1.5 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक हो सकता है। यह दर कार्ड नेटवर्क के आधार पर अलग-अलग होती है और इसके लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं है। वहीं, डेबिट कार्ड के लेनदेन पर MDR की दर लगभग 0.4 प्रतिशत से 0.90 प्रतिशत तक बताई गई है। इस पर भी कोई अधिकतम राशि सीमा नहीं है।