नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार शाम 5 बजे तक अलग-अलग इलाकों से 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। जबकि, करीब 1,500 लोगों की तलाश जारी है। लापता लोगों में 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान के बीच भोटेकोशी नदी में दोबारा बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। चीन से मिली सैटेलाइट तस्वीरों में नदी के रास्ते में पानी जमा होने से झील बनने की जानकारी सामने आई है। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि जलस्तर बढ़ रहा है और इसके टूटने की आशंका जताई गई है।
सबसे ज्यादा 132 शव चितवन जिले में मिले हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अब भी प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। रेस्क्यू अभियान के दौरान 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें से 11 की पहचान हो चुकी है। भोटेकोशी नदी के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने विशेष चेतावनी जारी की है। यात्रियों और बचाव अभियान में शामिल लोगों को भी नदी के किनारे और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। नदी में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में खतरा और गंभीर हो सकता है।
बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल और चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस होने के बाद शुरुआती तौर पर इसे भूकंप माना गया था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने पहले इसकी तीव्रता 4.4 बताई थी। बाद की जांच में सामने आया कि पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में आ गिरा था।
ल्हेंदे खोला भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। जबकि, भोटेकोशी का उद्गम चीन में होता है और यह नेपाल में प्रवेश करती है। पहाड़ का बड़ा हिस्सा नदी में गिरने से पैदा हुए कंपन को शुरुआत में भूकंप समझ लिया गया। बाद में USGS ने स्पष्ट किया कि महसूस किया गया झटका वास्तव में लैंडस्लाइड के कारण आया था और इसकी तीव्रता 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसी थी।
रसुवा इलाके से बचाए गए भारतीय नागरिकों को नुवाकोट के मैथिली बैरक में रखा गया है। यह नेपाली सेना का ट्रेनिंग सेंटर है। जिसे मौजूदा आपदा के दौरान राहत और बचाव अभियान के प्रमुख बेस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां आपदा प्रभावित लोगों को अस्थायी तौर पर ठहराने की व्यवस्था की गई है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार को बाढ़ से प्रभावित नुवाकोट जिले का दौरा किया। उन्होंने बट्टार बाजार स्थित आर्मी ट्रेनिंग सेंटर पहुंचकर आपदा से बने हालात का जायजा लिया और वहां चल रहे राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली।
इस बीच काठमांडू में मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। बाढ़ और भूस्खलन में जान गंवाने वाले लोगों की तस्वीरें मॉर्चुरी के बाहर लगाई गई हैं ताकि परिजन उन्हें देखकर अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान कर सकें। बड़ी संख्या में लोगों के अब भी लापता होने के कारण राहत एजेंसियों के सामने एक तरफ खोज अभियान तेज करने और दूसरी तरफ नदी में संभावित नई बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने की चुनौती बनी हुई है।