नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित हो रही 18वीं BRICS समिट में शामिल होने के लिए 11 सदस्यों के नेता भारत पहुंच गए हैं। ब्रिक्स की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशों के नेताओं को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार की बात भी कही। उन्होंने दुनिया को संदेश दिया कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलने का मंच है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच एक नाविक नेटवर्क का प्रस्ताव रखा। ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए समुद्री सुरक्षा नेटवर्क बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि समुद्री यात्री वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान देते हैं, फिर भी मुश्किल समय में उन्हें अक्सर जरूरी मदद नहीं मिल पाती। उनका प्रस्ताव है कि समुद्री इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाया जाए।

ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के सामने पीएम मोदी ने कहा, 'समुद्री यात्री ग्लोबल ट्रेड में बहुत बड़ा योगदान देते हैं, फिर भी मुश्किल समय में उन्हें अक्सर जरूरी मदद नहीं मिल पाती। मेरा प्रस्ताव है कि हम 'सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' बनाएं। इससे संबंधित देशों के समुद्री अधिकारियों और राजनयिक मिशनों के बीच संपर्क बनेगा, जिससे संकट के समय अलर्ट, मेडिकल मदद, परिवार को सूचना देने और लोगों को सुरक्षित निकालने में आसानी होगी।'

प्रधानमंत्री मोदी ने दो दिवसीय वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए 'ग्लोबल साउथ' को नियमों का पालन करने वाले के बजाय 'नियम तय करने वाला' बनना होगा। बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की थी।

इसमें सबसे अहम बयान पुतिन का रहा। उन्होंने अमेरिका और यूरोप पर तंज कसते हुए कहा कि पश्चिम अब कमजोर हो रहा है, पता नहीं ये देश खुद को G7 क्यों कहते हैं। दुनिया की 40% से ज्यादा GDP BRICS देशों से आई, G7 की हिस्सेदारी सिर्फ 29% रही। इसके बाद PM मोदी ने भी बिजनेस फोरम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी आबादी रहती है। ये दुनिया की 40% GDP में हिस्सा रखते हैं। भारत व्यापार बढ़ाना चाहता है और इसके लिए सुरक्षित समुद्री रास्ते जरूरी हैं।