मध्य प्रदेश में मानसून ने ब्रेक के बाद एक बार फिर जोर पकड़ा है। शुक्रवार को भोपाल समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। जबकि, शनिवार को मौसम विभाग ने 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भोपाल में तेज आंधी के साथ बारिश के दौरान विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम रह गई थी। जिसकी वजह से कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। दमोह के निचले हिस्सों में भी पानी भरने की स्थिति बन गई थी।

मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, शनिवार को उज्जैन, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, देवास, हरदा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट और छतरपुर में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में भी हल्की से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।

भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, आलीराजपुर, बुरहानपुर, झाबुआ, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, रतलाम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बदल सकता है। इन जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने का अनुमान है।

इससे पहले प्रदेश के कई जिलों में लगातार 3 से 4 दिन तक बारिश नहीं होने से तापमान के साथ उमस भी बढ़ गई थी। बारिश लौटने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। शुक्रवार को भोपाल में आंधी और बारिश का असर इतना रहा था कि दृश्यता काफी कम हो गई थी और सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई थी। दमोह में निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली थी।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक 801.3 मिमी यानी करीब 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होती है। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक करीब 2.7 इंच बारिश कम हुई है और कुल कमी लगभग 8 प्रतिशत है।

क्षेत्रवार स्थिति देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से करीब 1 प्रतिशत कम है। जबकि, पश्चिमी हिस्से में कमी 14 प्रतिशत तक है। हालांकि, पिछले सप्ताह हुई बारिश के कारण पूर्वी हिस्से के आंकड़ों में सुधार हुआ है।

पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1 प्रतिशत कम है। वहीं, बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य की तुलना में 3 से 26 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार आया है। इसी दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात भी बने थे। इसके चलते सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से की बारिश की कमी घटकर करीब 1 प्रतिशत तक पहुंची है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिले अभी भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1 से 56 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी ऐसे जिले हैं जहां सीजन में अब तक सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

मानसून की दोबारा सक्रियता के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है। ऐसे में जिन जिलों में अब तक बारिश की कमी बनी हुई है वहां आने वाले दिनों की बारिश से आंकड़ों में और सुधार हो सकता है।