यूरोप के सात देशों में सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम को निशाना बनाकर किए गए साइबर हमले से बड़े पैमाने पर खाद्य सामग्री खराब हो गई। हैकर्स ने दुकानों के इंटरनेट से जुड़े फ्रिज और फ्रीजर के कंट्रोल सिस्टम में सेंध लगाकर उनकी कूलिंग व्यवस्था प्रभावित कर दी। कई जगह तापमान 50 से 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके चलते दूध, मीट और अन्य ठंडे व जमे हुए खाद्य पदार्थों को बिक्री से हटाना पड़ा। बेल्जियम में इस घटना से लाखों यूरो का नुकसान होने की खबर सामने आई है।

बेल्जियम, स्वीडन, नीदरलैंड, एस्टोनिया, लक्जमबर्ग, फिनलैंड और आयरलैंड में रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच ये हमले हुए थे। यूरोन्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं ने सुपरमार्केट की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले 12 अक्टूबर को फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट में भी इसी तरह की साइबर सेंधमारी सामने आई थी।

यह भी पढ़ें:रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल का हत्यारोपी आगरा से गिरफ्तार, पुलिस ने पैर में मारी गोली

बेल्जियम में हमले का असर कई प्रमुख रिटेल कंपनियों के स्टोर पर पड़ा। स्थानीय अखबार ले सोइर के अनुसार, डेलहाइज के लगभग 40, कैरेफोर के 15, इंटरमार्शे के 15 और स्पार के 5 स्टोर प्रभावित हुए। इसके अलावा एक मीट कंपनी और मॉन्स शहर के नजदीक स्थित आइकिया स्टोर के रेफ्रिजरेशन सिस्टम में भी गड़बड़ी सामने आई। कुछ दुकानों में फ्रिज का तापमान 70 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। सामान्य तौर पर ठंडे तापमान में सुरक्षित रखे जाने वाले खाद्य पदार्थ इस असामान्य गर्मी के कारण खराब हो गए। बड़ी मात्रा में सामान नष्ट करना पड़ा। जिससे कंपनियों को लाखों यूरो का नुकसान हुआ।

बेल्जियम के साइबर सिक्योरिटी सेंटर ने इन हमलों की पुष्टि की है। डेलहाइज के प्रवक्ता के मुताबिक, प्रभावित स्टोर के फ्रिज सिस्टम में समस्या सामने आते ही कंपनी ने जरूरी कदम उठाए ताकि दुकानों का संचालन जारी रखा जा सके। वहीं, कैरेफोर ने भी साइबर हमले की पुष्टि की। हालांकि, कंपनी का कहना है कि उसे अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है।

आयरलैंड में सुपरवैल्यू सुपरमार्केट चेन के 223 स्टोर में से 13 के रेफ्रिजरेशन सिस्टम प्रभावित हुए। कंपनी ने एहतियात बरतते हुए इन स्टोर के फ्रिज और फ्रीजर में रखे सभी ठंडे एवं जमे हुए खाद्य उत्पादों को बिक्री से हटा दिया है। स्वीडन में आईसीए और कूप सुपरमार्केट के स्टोर पर भी हमले का असर दिखाई दिया। स्टॉकहोम के एक आईसीए स्टोर की मैनेजर के अनुसार, साइबर हमला रात करीब 2 बजे हुआ था। कर्मचारियों को सुबह 5:30 बजे इसकी जानकारी मिली। तब तक स्टोर के सभी फ्रीजर का तापमान लगभग 50 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका था और उनमें रखा खाद्य सामान खराब हो गया था। स्वीडिश अखबार आफ्टनब्लाडेट ने बताया कि कूप के भी छह स्टोर में इसी तरह की समस्या आई। इन घटनाओं की जांच देश की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी कर रही है।

यह भी पढ़ें:दिवाली पर दिल्ली में ग्रीन पटाखों को मिली अनुमति, अस्पताल-वृद्धाश्रम जैसे साइलेंस जोन में लगी रहेगी रोक

नीदरलैंड में कम से कम 17 कंपनियों के फ्रिज और फ्रीजर साइबर हमले की चपेट में आए। हालांकि, प्रभावित कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। एस्टोनिया में सेल्वर सुपरमार्केट का एक स्टोर निशाने पर आया जहां फ्रिज का तापमान बढ़कर 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। लक्जमबर्ग में डेलहाइज ने सुरक्षा के मद्देनजर अपना ऑर्डर सिस्टम अस्थायी रूप से बंद कर दिया। वहीं, फिनलैंड के मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वहां के कई के-ग्रुप सुपरमार्केट भी इस हमले से प्रभावित हुए हैं।

बेल्जियम की कंपनी सबकोबेल के CEO स्टीफन मोएलांस ने बताया कि हमले का तरीका फ्रांस में 12 अक्टूबर को सामने आए साइबर हमले जैसा था। उनके मुताबिक, हैकर्स ने फ्रिज की कूलिंग यूनिट को डीफ्रॉस्ट मोड में डाल दिया था। दरअसल, डीफ्रॉस्ट मोड का इस्तेमाल फ्रिज के भीतर जमी बर्फ को पिघलाने के लिए किया जाता है। 

इस प्रक्रिया के दौरान कूलिंग अस्थायी रूप से बंद हो जाती है। हैकर्स ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर फ्रिज और फ्रीजर का तापमान बढ़ा दिया। मोएलांस के अनुसार, इस समस्या का समाधान केवल सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करने से नहीं होगा। रेफ्रिजरेशन सिस्टम में कुछ तकनीकी बदलाव करना भी जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की सेंधमारी को रोका जा सके।

यह भी पढ़ें:राजस्थान में सड़क निर्माण के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई मशीन, 8 मजदूरों की मौत और 5 घायल

आधुनिक सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर को इंटरनेट से जुड़े सिस्टम के जरिए दूर बैठकर नियंत्रित किया जाता है। इससे कर्मचारियों को तापमान और कूलिंग की निगरानी करने में आसानी होती है लेकिन यही कनेक्टिविटी साइबर हमलों का रास्ता भी खोल सकती है। यूरोपीय आयोग के एक प्रवक्ता ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि साइबर हमलों का प्रभाव केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं रहता बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी इससे प्रभावित हो सकती है।