न्यू मैक्सिको। अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक जूरी ने टेक कंपनी Meta पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3000–3100 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया है। अदालत ने पाया कि कंपनी ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे अपने प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित बताकर यूजर्स को गुमराह किया है। जबकि, नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियां मौजूद थी।

यह मामला 2023 में तब शुरू हुआ था जब न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल रॉल टॉरेस ने मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को यौन शोषण, ऑनलाइन प्रलोभन और संभावित मानव तस्करी जैसे खतरों से बचाने में विफल रही है। करीब छह हफ्तों तक चले ट्रायल में 40 से ज्यादा गवाहों के बयान, सैकड़ों दस्तावेज, आंतरिक रिपोर्ट्स और ईमेल्स अदालत में पेश किए गए थे।

जांच के दौरान सामने आया कि कई मामलों में नाबालिग यूजर्स को अनचाहा और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया गया है। साथ ही उन्हें ऑनलाइन प्रिडेटर्स तक पहुंचने का जोखिम भी रहा है। एक आंतरिक रिसर्च के हवाले से बताया गया कि करीब 16% इंस्टाग्राम यूजर्स ने एक हफ्ते के भीतर अनचाही न्यूडिटी या सेक्सुअल कंटेंट देखने की शिकायत की थी।

इस केस में एक अहम भूमिका मेटा के पूर्व कर्मचारी आर्टरो बर्जर की रही। उन्होंने कंपनी छोड़ने के बाद व्हिसलब्लोअर के तौर पर कई खुलासे किए। उन्होंने गवाही में बताया कि कंपनी को प्लेटफॉर्म पर मौजूद खतरों की जानकारी थी। बावजूद इसके समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी खुद की नाबालिग बेटी को इंस्टाग्राम पर एक अजनबी ने आपत्तिजनक रिक्वेस्ट भेजा था।

जूरी ने अपने फैसले में कहा कि मेटा ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानूनों का उल्लंघन किया और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर गलत जानकारी दी है। आरोप यह भी साबित हुआ कि कंपनी ने बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा अपने बिजनेस और यूजर एंगेजमेंट को प्राथमिकता दी। प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स ऐसे बनाए गए थे जो यूजर्स खासकर बच्चों को लंबे समय तक ऐप पर बनाए रखते हैं। जिसकी वजह से मानसिक प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ती है।

हालांकि मेटा ने इस फैसले से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार निवेश कर रही है और इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी। कंपनी के मुताबिक, आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने और यूजर सेफ्टी के लिए बड़े स्तर पर सिस्टम पहले से लागू हैं।

अटॉर्नी जनरल रॉल टॉरेस ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा को अपने प्रोडक्ट्स के खतरों की जानकारी थी। बावजूद इसके उसने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और सच्चाई छिपाई।