बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। इंदौर लोकायुक्त की टीम ने गुरुवार को राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में छापेमार कार्रवाई करते हुए तीन डॉक्टरों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि डॉक्टर मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब में जांच के लिए भेजने के बदले भारी कमीशन वसूल रहे थे। कार्रवाई के दौरान कुल 25 हजार रुपए की रिश्वत राशि बरामद की गई।
गिरफ्तार आरोपियों में मेडिकल ऑफिसर डॉ. अमित शाक्य, डॉ. दिव्या साईं और संविदा चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोहर गोदारा शामिल हैं। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के मुताबिक, यह कार्रवाई राजपुर स्थित सेवा पैथोलॉजी लैब के मैनेजर 27 वर्षीय अदनान अली की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता ने बताया था कि अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को जांच के लिए उनकी लैब में भेजते थे और इसके बदले कमीशन की मांग करते थे।
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शिकायत में कहा गया कि शुरुआत में डॉक्टर लैब की कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा लेते थे लेकिन पिछले महीने तीनों डॉक्टरों ने आपस में मिलकर कमीशन बढ़ाकर सीधे 50 प्रतिशत कर दिया। आरोप है कि हर जांच पर आधी रकम डॉक्टरों को देनी पड़ रही थी। उदाहरण के तौर पर 300 रुपए की सामान्य ब्लड और यूरिन जांच पर 150 रुपए तथा 3000 रुपए की जांच पर 1500 रुपए तक मांगे जा रहे थे।
लैब संचालक अदनान अली ने लोकायुक्त पुलिस को बताया कि बढ़ती कमीशनखोरी के कारण लैब संचालन मुश्किल हो गया था। उनका कहना था कि लैब में महंगे केमिकल, कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल और किराए सहित कई खर्च होते हैं। ऐसे में 50 प्रतिशत कमीशन देना संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने 4 मई को लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
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शिकायत में यह भी बताया गया कि पिछले महीने की जांचों के एवज में डॉ. अमित शाक्य ने 18 हजार रुपए, डॉ. दिव्या साईं ने 8 हजार रुपए और डॉ. मनोहर गोदारा ने 21 हजार 800 रुपए की मांग की थी। लोकायुक्त टीम ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले का सत्यापन कराया। जांच में आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।
कार्रवाई के दौरान डॉक्टर कम रकम लेने पर सहमत हो गए। तय योजना के अनुसार, डॉ. अमित शाक्य को 8 हजार रुपए, डॉ. दिव्या साईं को 5 हजार रुपए और डॉ. मनोहर गोदारा को 12 हजार रुपए रिश्वत के रूप में दिए जाने थे। गुरुवार को लोकायुक्त की विशेष टीम ने जाल बिछाकर शिकायतकर्ता के माध्यम से रकम दिलवाई और जैसे ही तीनों डॉक्टरों ने पैसे लिए, टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
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लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों की भूमिका और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जाएगी।