नई दिल्ली। UPI के जरिए होने वाले डिजिटल लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर देश में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसके लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने चुपचाप UPI लेन-देन पर फीस वसूलने का रास्ता साफ कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय अमेरिका के दबाव में लिया गया है।

दरअसल, भारत सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत UPI पेमेंट को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत सरकार ने बैंकों को 2,000 रुपये तक के UPI लेन-देन और RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान पर कोई भी फीस लगाने पर रोक लगाई है।

हालांकि 2,000 रुपए से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर आगे चलकर MDR लगाया जा सकता है। ये चार्ज कितना होगा और किन कारोबारियों पर लागू होगा, ये अभी तय नहीं किया गया है। हालांकि, इस नोटिफिकेशन के बाद विपक्ष ने दो हजार से ज्यादा के ट्रांजेक्‍शन पर चार्ज वसूले जाने की आशंका जताई है।

इसे लेकर राहुल गांधी ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, 'मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है। सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।'

राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।