भोपाल। मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल रखा है। मंगलवार को बड़ी संख्या में अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के भोपाल स्थित निवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि मंत्री परमार ने उन्हें 15 सितंबर को मिलने के लिए बुलाया था, लेकिन वे बात तक नहीं कर रहे। ऐसे में मजबूरन उन्हें मंत्री परमार के निवास के बाहर धरने पर बैठना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारी अतिथि विद्वान नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने तथा जब तक नीति लागू नहीं होती, तब तक फॉलन आउट की प्रक्रिया रोकने की मांग कर रहे हैं। अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल के संयोजक डॉ राकेश कुमार परिहार ने बताया कि 10 जुलाई 2026 को रविंद्र भवन, भोपाल में आयोजित सम्मेलन में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उनकी समस्याओं को गंभीरता से स्वीकार किया गया था। इस दौरान अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण और स्थायित्व के संबंध में नीति बनाने का आश्वासन दिया गया था।
परिहार के मुताबिक, सरकार की ओर से हरियाणा मॉडल से बेहतर नीति बनाने और जल्द ही पॉलिसी लागू करने की बात भी कही गई थी। उन्होंने वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी 11 सितंबर 2023 को इसी तरह का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि भोपाल में अतिथि विद्वानों की महापंचायत के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ने फॉलन आउट की प्रक्रिया बंद कर उनके भविष्य को सुरक्षित करने की बात कही थी।
अतिथि विद्वानों ने बताया कि पिछले महीने 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के अवसर पर उज्जैन में मुख्यमंत्री आवास पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंची अतिथि विद्वान बहनों ने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधकर उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का आग्रह किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जल्द ही फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का आश्वासन दिया था। लेकिन मांग पूरी करना तो दूर मंत्री परमार उनसे मिलने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में मजबूरन उन्होंने मंत्री परमार के आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया है।
अतिथि विद्वानों ने कहा कि सरकार से हमारी सिर्फ दो मांगें हैं। राज्य सरकार नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की निश्चित समयावधि तय करे तथा नीति लागू होने तक फॉलन आउट की प्रक्रिया बंद करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे सरकार से अपने अनुभव, योग्यता, वर्षों की सेवा और शैक्षणिक योगदान के सम्मान के साथ अपने भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं। अतिथि विद्वानों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनके द्वारा किए गए सार्वजनिक वादों को पूरा करते हुए जल्द सकारात्मक और ठोस निर्णय लेगी।