मध्य प्रदेश के लिए प्रस्तावित बैतूल-खंडवा-वडोदरा फोरलेन कॉरिडोर पश्चिम और मध्य भारत के बीच सड़क संपर्क को नई गति देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। करीब 233.65 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर 4,415.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तैयार होने के बाद खंडवा से मुंबई की यात्रा का समय मौजूदा 14-15 घंटे से घटकर करीब 8 घंटे रह सकता है।

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी जिलों को मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा बैतूल और इंदौर के साथ महाराष्ट्र तथा गुजरात के प्रमुख शहरों तक पहुंच भी आसान होगी। परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की है।

यह भी पढ़ें:ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन से विमान का कबाड़ चोरी, तीन आरोपी गिरफ्तार

फिलहाल खंडवा से मुंबई जाने वाले यात्रियों को अपेक्षाकृत संकरे, घुमावदार और कुछ खराब हिस्सों वाले मार्ग से गुजरना पड़ता है। ट्रैफिक के कारण भी सफर लंबा हो जाता है। नया कॉरिडोर तैयार होने के बाद खंडवा की कनेक्टिविटी वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से मजबूत होगी। इससे खंडवा से मुंबई की दूरी तय करने में लगने वाला समय करीब 3 से 5 घंटे तक कम होने का अनुमान है। मौजूदा 14-15 घंटे की यात्रा घटकर लगभग 8 घंटे की हो सकती है।

कॉरिडोर मध्य प्रदेश से निकलकर महाराष्ट्र और गुजरात के महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने वाला मार्ग बनेगा। मध्य प्रदेश में बैतूल, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। महाराष्ट्र में इसका प्रभाव नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे क्षेत्रों तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, गुजरात में वडोदरा और अहमदाबाद से बेहतर सड़क संपर्क स्थापित होगा। प्रस्तावित मार्ग बैतूल जिले के हैवारखेड़ी से शुरू होकर आशापुर, खंडवा और देशगांव होते हुए बड़वानी जिले के जुलवानिया तक जाएगा। जुलवानिया के रास्ते यह मार्ग महाराष्ट्र के जलगांव-भुसावल क्षेत्र से जुड़ते हुए आगे गुजरात के वडोदरा तक बेहतर संपर्क बनाएगा।

यह भी पढ़ें:भोपाल से वाराणसी का सफर महज 8 घंटे में, 227KM लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बदलेगा कनेक्टिविटी

कॉरिडोर का महत्व केवल व्यापार और परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। साल 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होना है। महाराष्ट्र और गुजरात से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। ऐसे में यह सड़क नेटवर्क खंडवा और ओंकारेश्वर क्षेत्र के साथ उज्जैन की कनेक्टिविटी को भी बेहतर कर सकता है। इसके अलावा परियोजना से इंदौर एयरपोर्ट, नागपुर एयरपोर्ट और इंदौर के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क तक पहुंच को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे माल ढुलाई और क्षेत्रीय व्यापार को गति मिल सकती है।

केंद्र की कैबिनेट कमेटी करीब तीन महीने पहले इस परियोजना को मंजूरी दे चुकी है। फिलहाल इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। मध्य प्रदेश के बैतूल, खंडवा और बुरहानपुर जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद जनवरी 2027 से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर विकसित किया जाएगा। 

यह भी पढ़ें:शहडोल से BJP सांसद हिमाद्री सिंह का पति से तलाक, राजेंद्रग्राम कोर्ट ने दी डिवोर्स की डिक्री

भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर सिक्स लेन करने की योजना भी रखी गई है। करीब 233.65 किलोमीटर का यह कॉरिडोर तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात के बड़े शहरों से जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्गों में शामिल हो सकता है। इससे यात्रियों के साथ-साथ कृषि, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।