इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच दूषित पानी पीने से 24 लोगों की मौत की पुष्टि एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने की है। आयोग के अनुसार, सीवेज से दूषित पानी नगर निगम की पाइपलाइनों के जरिए घरों तक पहुंचा जिसमें ईकोलाई, साल्मोनेला और विब्रियो कॉलेरी जैसे रोगजनक पाए गए। जांच में नए नर्मदा जल पाइपलाइन नेटवर्क के लिए टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी को इस जलजनित बीमारी के फैलने की प्रमुख वजह बताया गया है।
रिटायर्ड मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी करीब 150 पन्नों की रिपोर्ट पिछले सप्ताह हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ को सौंप दी। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि इस घटना में मृतकों की संख्या 36 है। हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह सुनवाई के दौरान रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगाते हुए इसे केवल रजिस्ट्रार कार्यालय में अधिवक्ताओं को दिखाने का निर्देश दिया है।
मामले के एक याचिकाकर्ता अधिवक्ता मनीष यादव के मुताबिक, आयोग ने इंदौर नगर निगम के कुछ इंजीनियरों और एक अतिरिक्त आयुक्त को टेंडर प्रक्रिया में देरी के लिए जिम्मेदार माना है। यह टेंडर क्षतिग्रस्त सीवेज और पेयजल लाइनों को बदलकर नई नर्मदा जल आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ने के लिए होना था। यादव ने कहा कि टेंडर में देरी के चलते सीवेज और पेयजल लाइनों के मिश्रित होने की स्थिति बनी और दूषित पानी भागीरथपुरा के घरों तक पहुंच गया। हालांकि, उन्होंने जिम्मेदार ठहराए गए अधिकारियों के नाम बताने से इनकार किया।
आयोग की रिपोर्ट में शामिल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए यादव ने बताया कि मृतकों की मौत गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण, डायरिया और डिहाइड्रेशन के कारण हुई। दूषित पानी के नमूनों में ईकोलाई, साल्मोनेला और विब्रियो कॉलेरी जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए थे।
मामले से जुड़े एक अन्य अधिवक्ता ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि जांच रिपोर्ट ने तत्कालीन इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा को इस मामले में क्लीन चिट दी है। दिलीप यादव को जलजनित बीमारी फैलने के बाद पद से हटा दिया गया था। वहीं, जुलाई 2025 में जब टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई थी। उस समय शिवम वर्मा नगर निगम आयुक्त के पद पर तैनात थे।
हालांकि, रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं हुई है। इंदौर नगर निगम, राज्य के नगरीय विकास विभाग, दिलीप यादव और शिवम वर्मा से इस संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई थी लेकिन उनकी ओर से जवाब नहीं मिला।
जांच आयोग ने मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की भी सिफारिश की है। मौजूदा 2 लाख रुपए के मुआवजे को बढ़ाकर 4 लाख रुपए करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, कुछ श्रेणियों में नुकसान की स्थिति के आधार पर अधिकतम 20 लाख रुपए तक मुआवजा देने की सिफारिश भी की गई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन परिस्थितियों में कितनी राशि दी जाएगी।
भागीरथपुरा में बीमारी फैलने के बाद से हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। पहली सुनवाई 24 दिसंबर 2025 को प्रकोप सामने आने के बाद हुई थी। इसके बाद 27 जनवरी को हाईकोर्ट ने जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता को जांच आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। आयोग को संक्रमण के कारण और दूषित पानी के स्रोत का पता लगाने, वास्तविक मृतक संख्या निर्धारित करने, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता की जांच करने, भविष्य में ऐसी घटना रोकने के उपाय सुझाने, दीर्घकालीन बुनियादी ढांचे में सुधार की सिफारिश करने और प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने सहित कुल नौ बिंदुओं पर जांच सौंपी गई थी।