नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर विकासखंड स्थित एक सरकारी स्कूल में मिड डे मील खाने के बाद 45 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को पेट दर्द और उल्टियां होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, भोजन बनाने वाले स्वसहायता समूह ने गांव के एक कार्यक्रम से बचा हुआ दो दिन पुराना गुथा आटा इस्तेमाल किया था। मामले में प्रशासन ने संबंधित समूह को हटाकर जांच शुरू कर दी है।

घटना मंगलवार 3 नवंबर दोपहर करीब 1:30 बजे की है। शासकीय माध्यमिक शाला में बच्चों को खीर-पूरी परोसी गई थी। खाना शुरू करते ही कुछ बच्चों ने पूरियों के स्वाद और गंध को लेकर शिकायत की। भोजन में खटास और दुर्गंध महसूस होने पर प्रधान पाठक गणेशदत्त बादल ने खुद पूरियां चखकर देखीं। इसके बाद उन्होंने भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

बताया जा रहा है कि एकता स्वसहायता समूह ने पूरियां बनाने के लिए गांव में आयोजित एक कार्यक्रम से लाया गया पुराना गुथा आटा इस्तेमाल किया था। हालांकि, प्रधान पाठक की आपत्ति के बावजूद समूह के सदस्यों ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की। इसी बीच भोजन करने वाले बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। कई बच्चों को पेट दर्द और उल्टियां होने लगी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधान पाठक ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद उपलब्ध वाहनों और एंबुलेंस के जरिए प्रभावित बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक शाला के 8 और माध्यमिक शाला के 37 बच्चों को मिलाकर कुल 45 बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया है।

घटना की सूचना मिलने पर कलेक्टर रजनी सिंह और एसपी डॉ. ऋषिकेश मीना भी जिला अस्पताल पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने बच्चों का हाल जाना और चिकित्सकों को समुचित इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डॉक्टरों के मुताबिक, सभी बच्चों की हालत फिलहाल सामान्य है और कोई भी खतरे से बाहर नहीं है। एहतियात के तौर पर उन्हें अस्पताल में निगरानी में रखा गया है।

मामले में कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मिड डे मील तैयार करने वाले एकता स्वसहायता समूह को काम से हटा दिया है। साथ ही घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में बच्चों को दूषित भोजन परोसने की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।