ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर बीएएमएस इंटर्न छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। गुरुवार को छात्रों ने कॉलेज के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर नारेबाजी की। वे वर्तमान में मिल रहे 9383 रुपये मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 22,500 रुपये करने और एमबीबीएस इंटर्न के समान मानदेय देने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि करीब एक महीने से आश्वासन मिलने के बावजूद उन्हें अब तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुताबिक, वे पिछले एक महीने से अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे थे। इस दौरान धरना देने के साथ रैली भी निकाली गई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। छात्रों का आरोप है कि उन्हें लगातार बातचीत होने की जानकारी दी जा रही है लेकिन स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर ठोस निर्णय सामने नहीं आया। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने कॉलेज के मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध दर्ज कराया।

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बीएएमएस इंटर्न छात्रों को फिलहाल हर महीने 9,383 रुपये मिलते हैं। छात्र इसे बढ़ाकर 22,500 रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आयुर्वेद के इंटर्न भी चिकित्सा सेवाओं में जिम्मेदारियां निभाते हैं इसलिए उन्हें एमबीबीएस इंटर्न से कम स्टाइपेंड नहीं मिलना चाहिए। छात्रों ने नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आयुर्वेद इंटर्न को एमबीबीएस इंटर्न के बराबर स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में उन्हें अपेक्षाकृत कम राशि मिल रही है।

दूसरे राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए छात्रों ने बताया कि दिल्ली में इंटर्न को 23,500 रुपये, बिहार में 27,000 रुपये और तेलंगाना में 29,792 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। छात्रों का कहना है कि इन राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में मिलने वाला मानदेय काफी कम है।

छात्र गौरव विश्वकर्मा ने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन मिलने की बात कही गई थी। इसके बावजूद लगभग एक महीने बीत जाने के बाद भी छात्रों को लिखित जवाब नहीं मिला है। उनका कहना है कि एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की प्रक्रिया जल्द पूरी हो गई। जबकि, आयुर्वेद के विद्यार्थियों की मांग अब तक लंबित है।

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गौरव के मुताबिक, दोनों ही चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं और काम के लिहाज से उनके मानदेय में इतना अंतर नहीं होना चाहिए। छात्रों की मांग है कि सरकार इस मामले में स्थिति स्पष्ट करे और बढ़ी हुई राशि लागू करने के संबंध में लिखित आदेश जारी करे। वहीं, डॉ. आस्था झाला ने कहा कि छात्र लंबे समय से लिखित आश्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जब तक मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

महाविद्यालय परिसर में आयुर्वेदिक अस्पताल भी संचालित होता है। छात्रों की हड़ताल और मुख्य गेट पर तालाबंदी के कारण अस्पताल में दवा लेने पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। गेट बंद मिलने पर कई मरीजों को वापस लौटना पड़ा। छात्रों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर विवाद का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि वे अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं ताकि उन्हें बार-बार प्रदर्शन करने के लिए मजबूर न होना पड़े। फिलहाल स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का विरोध जारी है और उनकी नजर सरकार के अगले कदम पर है।