पति को नीले ड्रम में भरने वाली मुस्कान को फांसी की सजा, प्रेमी साहिल को भी सजा-ए-मौत

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। सौरभ राजपूत की मां ने फैसले पर संतोष जताया।

Updated: Oct 14, 2026, 07:39 PM IST

मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है। दोनों को 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या करने और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि दोनों ने बेहद क्रूर तरीके से हत्या की है इसलिए उन्हें माफी नहीं दी जा सकती। अदालत के निर्णय के बाद सौरभ की मां भावुक हो गई। उन्होंने कहा कि उन्हें अब शांति से न्याय मिल गया है।

अदालत में सजा का ऐलान होने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़ा गया। सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों रोने लगे। न्यायाधीश ने मुस्कान से पूछा कि जब वह अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या की दोषी है तो वह अपने लिए क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने अपनी बच्चियों का ख्याल रखने की बात कही और फिर चुप हो गई।

इसके बाद न्यायाधीश ने साहिल से भी यही सवाल किया लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। अदालत ने दोनों के अपराध की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड का फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अधर्म के काम पर सजा देना धर्म है।

सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने हत्या के बाद पहचान और अपराध से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की थी। इसके लिए सौरभ के शव को पांच टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में रखा गया। इसके बाद ड्रम में सीमेंट का घोल भर दिया गया था।

इस क्रूर हत्याकांड ने पूरे इलाके में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अब अदालत से दोनों को फांसी की सजा मिलने के बाद सौरभ के परिवार को न्यायिक स्तर पर बड़ी राहत मिली है।

मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में भी आगे की व्यवस्था को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, जेल में आखिरी बार 1975 में मुजफ्फरनगर के करम सिंह को फांसी दी गई थी। उसके बाद से यहां किसी कैदी को फांसी नहीं दी गई है।

यदि अदालत का मृत्युदंड संबंधी फैसला अंतिम रूप से लागू होता है तो साहिल मेरठ जेल में फांसी पाने वाला दूसरा पुरुष और मुस्कान यहां फांसी पाने वाली पहली महिला होगी। साल 2014 में निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को भी इसी जेल में फांसी देने की तैयारी की गई थी लेकिन अंतिम समय में यह प्रक्रिया रोक दी गई थी।

मेरठ में किसी महिला को पहली बार फांसी की सजा सुनाए जाने का यह मामला है। वहीं, जानकारी के अनुसार, शहर में किसी मामले में मृत्युदंड सुनाए जाने का इससे पहले का मामला साल 2003 का था।

फैसले के बाद जिला कारागार प्रशासन ने दोनों दोषियों की सुरक्षा और आगे की व्यवस्था को लेकर बैठक की। जेल प्रशासन की योजना के अनुसार, मुस्कान और साहिल को 24 घंटे के भीतर विशेष बैरक में स्थानांतरित किया जाएगा।

अब तक मुस्कान रस्तोगी बैरक नंबर 12बी में और साहिल शुक्ला बैरक नंबर 15 में बंद थे। दोनों को सामान्य कैदियों की तरह कपड़े पहनने की अनुमति थी, लेकिन मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद उनके पहनावे में भी बदलाव किया जाएगा। मुस्कान को क्रीम रंग की साड़ी या सूट और साहिल को सफेद कुर्ता-पायजामा पहनना होगा।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि अदालत के फैसले की आधिकारिक प्रति मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही दोनों दोषियों को कैदी नंबर भी आवंटित किए जाएंगे।