भोपाल। मूंग की सौ फीसदी खरीदी और खाद की व्यवस्था में ई-टोकन सिस्टम को बंद करने जैसी मांगों को लेकर भोपाल में चल रहा किसान आंदोलन खत्म हो गया है। बुधवार देर रात सरकार द्वारा मांगों पर सहमति बनने के बाद सभी किसान अपने-अपने जिले की ओर रवाना हो गए। राज्य सरकार ने 60 प्रतिशत मूंग खरीदने का ऐलान किया है। साथ ही किसानों की अन्य मांगें भी मान ली गई हैं। हालांकि, राज्य सरकार किसानों के आगे तब झुकी, जब वे सीएम हाउस के करीब पहुंच गए।

दरअसल, मंगलवार को ही किसान बाहरी बैरिकेड्स तोड़ते हुए राजधानी भोपाल में प्रवेश कर चुके थे। किसान हजारों की संख्या में थे और वे अपने साथ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर राशन व अन्य आवश्यक वस्तुएं भी लेकर आए थे। किसानों की तैयारी मांगें स्वीकार नहीं होने तक प्रदर्शन करने की थी।

बुधवार को आंदोलन के दूसरे दिन भी राजधानी की रफ्तार लगभग थमी रही। आलम यह था कि रोशनपुरा से न्यू मार्केट और सीएम हाउस तक का इलाका पुलिस छावनी में बदल गया। बुधवार सुबह नाश्ते के बाद किसान सीएम हाउस की ओर बढ़ने लगे। दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर AIIMS के पास किसानों ने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी कि 10 मिनट में यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे बैरिकेड्स तोड़ देंगे। चूंकि यहां चार लेयर की बैरिकेडिंग थी, इसलिए अधिकारियों ने किसानों की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन पुलिस कुछ समझ पाती, उससे पहले ही पंद्रह मिनट बाद यह बैरिकेडिंग ध्वस्त हो चुकी थी और किसान आगे बढ़ रहे थे।

बताया जा रहा है कि किसान तय प्लानिंग के साथ बैरिकेड्स तोड़ते थे। पहले वे बैरिकेडिंग का वीडियो बनाकर लाते थे और फिर उसके आधार पर तैयारी करते थे। अलग-अलग डिजाइन की बैरिकेडिंग के लिए उनके प्लान भी बदलते थे। वे उस पॉइंट पर फोकस करते थे, जहां बैरिकेड्स कमजोर होते थे और फिर अचानक एक साथ आकर आसानी से बैरिकेड्स हटा देते थे।

किसानों के आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन को कई स्कूलों में छुट्टी करनी पड़ी। सड़कों पर स्कूल बसें और गिट्टी से भरे डंपर तक बैरिकेड बनाकर खड़े कर दिए गए। इसके बावजूद किसान एक-एक कर कुल 22 बैरिकेड्स तोड़ते हुए मुख्यमंत्री निवास से महज एक किमी दूर रोशनपुरा चौराहे तक पहुंच गए। उनके सामने अब सिर्फ तीन बैरिकेड बचे थे और अधिकारियों के हाथ-पांव फूल रहे थे।

हालांकि, रोशनपुरा चौराहे पर पहुंचने के बाद किसानों ने आगे नहीं बढ़ने का फैसला लिया। इस दौरान किसान नेताओं ने ऐलान किया कि अब तक आंदोलन भगत सिंह के तेवर में चल रहा था, लेकिन अब महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।किसान नेताओं को आशंका थी कि यदि ये बैरिकेड्स टूटे तो लोग सीएम हाउस में घुस जाएंगे। ऐसे में आंदोलन को नुकसान हो सकता है। बहरहाल, सरकार को रात 11 बजे किसानों के आगे झुकना पड़ा।

दरअसल, किसानों के रोशनपुरा पहुंचने के बाद आनन-फानन में सीएम मोहन यादव ने चार मंत्रियों की समिति गठित की, जिसे किसान प्रतिनिधियों से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई। मंत्रालय में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, विश्वास सारंग व कृष्णा गौर की समिति ने किसान नेताओं से करीब दो घंटे चर्चा की। इसके बाद मूंग खरीदी का दायरा 25% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया, जबकि खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का ऐलान किया गया। इस तरह देर रात आंदोलन खत्म हो गया। रात सवा 11 बजे सभी किसान लौटने लगे।

जानकारी के अनुसार, इस आंदोलन के दौरान 11 किसान नेता घायल भी हुए। किसान नेता केदार सिरोही ने बताया कि उनका पैर फ्रैक्चर हुआ है। साथ ही आम किसान यूनियन के राम ईनाणिया का हाथ फ्रैक्चर हुआ है। किसान नेता संजय खेरवा को कमर में गहरी चोट लगी है। किसान नेता कारण चौधरी भी घायल हैं। इसके अलावा कुछ लोगों की उंगलियां भी टूटी हैं।

किसान नेता केदार शिरोही ने कहा कि हम किसान हैं। शरीर की चोट तो हम सहन कर लेंगे, लेकिन आर्थिक चोट बिल्कुल सहन नहीं करेंगे। आर्थिक चोट करेगी तो यह घाव ज्यादा गहरा होगा, जिससे किसान रिकवर नहीं हो सकता। इसलिए हमें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा। हम सरकार को संदेश देना चाहते थे कि यदि सरकार हमारे साथ अन्याय करेगी तो हम सीएम हाउस तक दस्तक दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि बैरिकेड्स तोड़ना न किसानों का लक्ष्य था और न ही उन्होंने इस बात की कोई गिनती की कि कितने बैरिकेड्स टूटे। उन्होंने कहा कि हमें अहंकारी सरकार का घमंड तोड़ना था और उसे टूटते हुए सभी ने देखा। केदार शिरोही ने कहा कि पहले तो सरकार किसानों से संवाद के लिए तैयार ही नहीं थी, लेकिन जब किसान सीएम हाउस तक पहुंच गए तब उन्होंने संवाद शुरू किया। हमारी अधिकांश मांगों पर सरकार ने सहमति जताई तो हम अपने-अपने घरों को लौट आए।