इंदौर। नीट पेपर लीक और परीक्षा में धांधली को लेकर चले छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान के इस्तीफे पर अब बीजेपी के सीनियर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा दावा किया है। विजयवर्गीय ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली में छात्र आंदोलन शुरू होने के पहले दिन ही भाजपा हाईकमान के सामने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी।

विजयवर्गीय ने इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें जो भी दायित्व सौंपा जाता है, वह उसे बड़ी ईमानदारी और समर्पण से निभाते हैं। उन्होंने कहा, 'पहले दिन से जैसे ही (छात्र) आंदोलन शुरू हुआ था, प्रधान ने पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष से कहा कि अगर उन्हें ऐसा लगता है, तो वह (शिक्षा मंत्री के पद से) इस्तीफा दे देते हैं।'

विजयवर्गीय के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उस समय प्रधान को यह कहते हुए इस्तीफा देने से मना कर दिया था कि जब तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वह इस्तीफा नहीं देंगे और किसी व्यक्ति से इस्तीफे की बात तक नहीं करेंगे।

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव विजयवर्गीय ने कहा कि बाद में बनीं परिस्थितियों के चलते जब पार्टी ने प्रधान के इस्तीफे का निर्णय लिया, तो उन्होंने तुरंत इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि प्रधान के इस्तीफे से उन सब विदेशी ताकतों के मंसूबे खत्म हो गए जो बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह भारत में हिंसा फैलाकर अस्थिरता पैदा करना चाहती थीं। इसलिए प्रधान ने जो काम किया है, उसके लिए मैं उनको बधाई भी देता हूं।

प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस नेताओं के जश्न मनाने पर विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए कहा कि पड़ोसी के घर में बच्चा पैदा होने पर कांग्रेस ढोलक बजा रही है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र आंदोलन में कांग्रेस की क्या भूमिका थी? बच्चों ने आंदोलन किया, वे (कांग्रेस) जाकर उसके पीछे खड़े हो गए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष बिल्कुल निराश हो गया है और निराशा के पल में उन्हें आशा की एक किरण कॉकरोच जनता पार्टी में दिखी।