मध्य प्रदेश में प्रस्तावित सागर-सतना ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने के बाद भोपाल से वाराणसी की सड़क यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। करीब 227 किलोमीटर लंबा यह 4 लेन एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर सागर, दमोह, पन्ना, सतना, मैहर, सीधी और रीवा जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। मौजूदा करीब 760 किलोमीटर के रास्ते की तुलना में भोपाल से वाराणसी की दूरी लगभग 590 किलोमीटर तक सिमट सकती है और सफर करीब 8 घंटे में पूरा होने का अनुमान है।
इस परियोजना पर लगभग 9,850 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) इसकी तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम रफ्तार करीब 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना है।
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सागर और सतना के बीच वर्तमान सड़क दूरी लगभग 300 किलोमीटर है। मौजूदा रास्ते पर ट्रैफिक और सड़क की स्थिति के कारण इस दूरी को तय करने में 6 से 8 घंटे तक लग जाते हैं। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद दोनों शहरों के बीच दूरी घटकर करीब 227 किलोमीटर रह जाएगी। इससे सागर से सतना की यात्रा लगभग 3 घंटे में पूरी होने की संभावना है। इसका फायदा भोपाल से रीवा जाने वाले यात्रियों को भी मिल सकता है। बेहतर और तेज सड़क मार्ग तैयार होने से बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के बीच आवागमन सुगम होगा।
प्रस्तावित कॉरिडोर का असर केवल सागर और सतना तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए दमोह, पन्ना, मैहर, सीधी और रीवा सहित कई महत्वपूर्ण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। सड़क संपर्क बेहतर होने से यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन और स्थानीय कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
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सागर-सतना एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में विकसित हो सकता है। सतना के आगे सड़क नेटवर्क के जरिए मिर्जापुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे उत्तर प्रदेश के शहरों तक पहुंच आसान होगी। इससे भोपाल और इंदौर की दिशा से आने वाले यात्रियों तथा मालवाहक वाहनों के लिए यूपी जाने का तेज विकल्प तैयार हो सकता है।
इस परियोजना को पश्चिमी मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी से जोड़ने की भी संभावना है। सागर-सतना कॉरिडोर यदि प्रस्तावित सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ता है तो राजस्थान के जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों से लेकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी और लखनऊ तक सड़क नेटवर्क और मजबूत हो सकता है। इससे मध्य प्रदेश एक बड़े अंतरराज्यीय सड़क कॉरिडोर के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।
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राज्य सरकार की ओर से परियोजना को मंजूरी दी जा चुकी है और इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद निर्माण से संबंधित औपचारिक कदम शुरू होंगे। एक्सप्रेसवे पूरा होने पर मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों से पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक सड़क यात्रा का समय घट सकता है। खास तौर पर भोपाल-वाराणसी और सागर-सतना के बीच तेज कनेक्टिविटी इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा मानी जा रही है।