मध्य प्रदेश के सागर जिले के चर्चित जहरीली शराबकांड में फरार चल रहे 21 वर्षीय शिवांजय राजपूत को पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है। रविवार सुबह करीब 4 बजे कठुआ नाला के जंगल के पास पुलिस और शिवांजय का सामना हुआ था। पुलिस के मुताबिक, सरेंडर के लिए कहने पर उसने फायरिंग कर दी थी। जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई। एक गोली शिवांजय के पैर में लगी जिसके बाद उसे पकड़ लिया गया। घायल आरोपी को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले में बीते तीन दिनों में यह दूसरा एनकाउंटर है।
पुलिस ने उसके पास से 315 बोर का देशी कट्टा, तीन जिंदा कारतूस, तीन खाली कारतूस, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल बरामद की है। शिवांजय बंडा थाना क्षेत्र के छापरी गांव का रहने वाला है और शराबकांड के मुख्य आरोपी चंद्रभान सिंह राजपूत उर्फ चंदू का रिश्तेदार बताया गया है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।
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पुलिस को सूचना मिली थी कि शिवांजय कठुआ नाला के जंगल के रास्ते अपने गांव छापरी की ओर जा रहा है। सूचना के बाद बांदरी और बहरोल थानों की पुलिस टीमों ने इलाके में घेराबंदी की। इसी दौरान रविवार तड़के पुलिस का सामना शिवांजय से हो गया। पुलिस का कहना है कि टीम ने उसे हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन उसने पुलिस पर तीन गोलियां चला दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें शिवांजय के पैर में गोली लगी। घायल होने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
जांच में शिवांजय की भूमिका शराब तैयार होने के बाद उसे आसपास के गांवों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, वह चंद्रभान सिंह राजपूत के संपर्क में था और मनीष लोधी से भी जुड़ा हुआ था। उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में तीन मामले दर्ज हैं। सागर शराबकांड में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इससे पहले 11 सितंबर को 20 हजार रुपए के इनामी आरोपी रवि लखेरा को भी बरायठा क्षेत्र के हनुमान टोंग के जंगल से शॉर्ट एनकाउंटर के बाद पकड़ा गया था। पुलिस की कार्रवाई में उसके पैर में भी गोली लगी थी।
मामले की जांच में शराब तैयार करने से लेकर उसकी सप्लाई और नेटवर्क संचालन तक कई लोगों की भूमिका सामने आई है। अब तक 33 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें 19 की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक आरोपी की मौत हो चुकी है और एक अस्पताल में भर्ती है। वहीं, मनीष लोधी और सिद्धार्थ कुशवाहा समेत 12 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
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पुलिस की जांच के मुताबिक, 2 सितंबर को ततरवारा गांव में चंद्रभान उर्फ चंदू के मक्के के खेत में अवैध शराब तैयार की गई थी। आरोप है कि रवि लखेरा और मनीष लोधी ने शराब बनाने के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई थी। इसके बाद चंद्रभान, शिवांजय और मनीष ने मिलकर करीब 50 पेटी शराब तैयार की।
तैयार शराब को सागर गोल्ड के नाम से आसपास के गांवों में पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों की जानकारी सामने आने के बाद आरोपियों ने मामले से जुड़े सबूत नष्ट करने की कोशिश भी की। करीब 25 पेटी शराब खेत में जला दी गई। जबकि, शराब बनाने में इस्तेमाल सामान को नाले में बहा दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, रवि लखेरा मूल रूप से छतरपुर जिले के महोबा का रहने वाला है और लंबे समय से उत्तर प्रदेश के ललितपुर की गंगापुरम कॉलोनी में रह रहा था। उसे अंतरराज्यीय शराब तस्कर बताया गया है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ करीब 25 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है जिनमें बड़ी संख्या आबकारी एक्ट से जुड़े मामलों की है। जांच एजेंसियों के अनुसार, रवि को नकली शराब तैयार करने और उसके लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जानकारी थी। आरोप है कि वह अपनी टीम के जरिए शराब तैयार करवाता था।
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बरेठी शराब दुकान का लाइसेंसी ठेकेदार मनीष लोधी उर्फ यशवंत सिंह भी मामले में आरोपी है। पुलिस के अनुसार, उसने रवि लखेरा से शराब बनाने का तरीका सीखा और लाइसेंसी कारोबार की आड़ में अवैध शराब का नेटवर्क खड़ा किया। मनीष के खिलाफ 11 अपराध दर्ज बताए गए हैं। इनमें छह आबकारी एक्ट से संबंधित हैं। बंडा में सागर रोड स्थित उसका बार भी था जिसे शराबकांड सामने आने के बाद सील कर दिया गया।
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शराबकांड की न्यायिक जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच की जिम्मेदारी रिटायर्ड जज चौहान को दी गई है। जिन्होंने व्यापम मामले की जांच की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापम मामले में जज ने आरोपियों को बचाया था। इसलिए उन्हें मौजूदा जांच पर भरोसा नहीं है। दिग्विजय सिंह ने जज को जांच से हटाने के साथ ही शराब बनाने वालों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।