भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर में इंटर्न्स ने चिकित्सीय कार्य का बहिष्कार करते हुए जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। आंदोलन का असर अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। इंटर्न्स की मांग है कि वर्तमान में मिलने वाला 14,337 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड बढ़ाकर कम से कम 30,000 रुपए किया जाए।
आंदोलन कर रहे इंटर्न्स का कहना है कि मध्य प्रदेश में मेडिकल इंटर्न्स को देश के कई राज्यों की तुलना में बेहद कम स्टाइपेंड मिलता है। उनका दावा है कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इंटर्न्स को 44 हजार रुपए तक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि प्रदेश मेडिकल शिक्षा की फीस के मामले में देश के टॉप पांच राज्यों में शामिल है। जबकि, स्टाइपेंड देने के मामले में लगभग 25वें स्थान पर है। ऐसे में समान कार्य करने के बावजूद उन्हें सम्मानजनक आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा।
यह भी पढ़ें:भोपाल में आज से दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी मेट्रो, पीक आवर्स में हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन
आंदोलनकारी सिद्धार्थ कुमार राय ने कहा कि मध्य प्रदेश के इंटर्न भी अन्य राज्यों के मेडिकल इंटर्न्स की तरह समान जिम्मेदारियां निभाते हैं और उसी स्तर की परीक्षाएं पास कर यहां तक पहुंचते हैं। इसलिए स्टाइपेंड में समानता मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आंदोलन के अगले चरण के तहत शनिवार को हमीदिया अस्पताल से भदभदा चौराहे तक बाइक रैली निकालकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाएगी।
इंटर्न्स का कहना है कि पिछले एक महीने से वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार के सामने रख रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग, वित्त विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और जनप्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से भी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई थी। वहां उन्हें सकारात्मक आश्वासन तो मिला लेकिन अब तक कोई लिखित निर्णय या भरोसा नहीं दिया गया। आंदोलनकारी अंकित पांडे के अनुसार, जब तक सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश जारी नहीं करती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
यह भी पढ़ें:कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला मेडल, बिहार के झंडू कुमार ने पैरा पावरलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज
इस आंदोलन की शुरुआत 23 जुलाई को हुई थी जब करीब 1,200 एमबीबीएस इंटर्न और भावी इंटर्न्स ने भोपाल में हमीदिया अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक पदयात्रा निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा था। मांग पूरी नहीं होने पर शुक्रवार दोपहर 2 बजे से उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जो अब दूसरे दिन भी जारी है।
इसी मुद्दे को लेकर कुछ दिन पहले एमबीबीएस इंटर्न्स का एक प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी मिला था। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें प्रदेश में मेडिकल इंटर्न्स की आर्थिक स्थिति और कम स्टाइपेंड की जानकारी दी थी। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इंटर्न्स का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग का समर्थन किया।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में दिग्विजय सिंह ने लिखा कि प्रदेश में शासकीय और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में कुल 3,655 एमबीबीएस इंटर्न्स हैं। इनमें 2,055 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इंटर्न्स को केवल 14,337 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। जबकि, मध्य प्रदेश में एमबीबीएस की वार्षिक फीस करीब 1 लाख रुपए है। इसके विपरीत तमिलनाडु, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में अपेक्षाकृत कम फीस होने के बावजूद इंटर्न्स को अधिक स्टाइपेंड मिलता है।
यह भी पढ़ें:NTA के 47 अधिकारी-कर्मचारी हटाए गए, 4 नए जनरल मैनेजर और 16 यंग प्रोफेशनल्स की होगी भर्ती
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि मेडिकल शिक्षा की फीस के मामले में मध्य प्रदेश देश में पांचवें स्थान पर है। जबकि, स्टाइपेंड देने के मामले में लगभग 25वें स्थान पर है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इंटर्न्स की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनका स्टाइपेंड बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपए प्रतिमाह किया जाए ताकि वे आर्थिक दबाव से मुक्त होकर बेहतर चिकित्सा सेवाएं दे सकें।