भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में साइबर ठगों ने कानून और जांच एजेंसियों के नाम का डर दिखाकर एक रिटायर्ड शिक्षक दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर दिया। खुद को मुंबई पुलिस, केंद्र सरकार का जांच अधिकारी, डीएसपी, आईजी और बैंक अफसर बताने वाले ठगों ने 64 वर्षीय प्रेम सिंह कुशवाह और उनकी पत्नी को करीब 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट में रखा और इस दौरान 29 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली।

घटना की शुरुआत 7 जनवरी की सुबह करीब 11:30 बजे हुई जब प्रेम सिंह कुशवाह के मोबाइल पर एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और दावा किया कि मुंबई की सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित कैनरा बैंक शाखा में उनके नाम से जुड़े खाते से करोड़ों रुपये की ब्लैक मनी का लेनदेन हुआ है। ठग ने इस कथित लेनदेन को बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से जोड़ते हुए कहा कि इसमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल हैं। डर का माहौल बनाने के लिए महाराष्ट्र के राज्यसभा सांसद संजय राउत का नाम भी लिया गया और कहा गया कि उनसे जुड़े खाते में भी भारी लेनदेन सामने आया है।

इसके बाद ठगों ने गिरफ्तारी और बदनामी का डर दिखाया। प्रेम सिंह कुशवाह को बताया गया कि जांच एजेंसी की सूची में अंतिम 47 नामों में उनका नाम शामिल है और यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो तुरंत गिरफ्तारी होगी। साथ ही मीडिया में नाम उछलने से सामाजिक प्रतिष्ठा भी खत्म हो जाएगी। इस दबाव में आकर बुजुर्ग दंपति घबरा गए और घर के एक कमरे में खुद को बंद कर लिया।

यहीं से डिजिटल अरेस्ट का खेल शुरू हुआ। वीडियो कॉल पर ठगों ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी व्यक्ति से संपर्क नहीं कर सकते। यहां तक कि घर में मौजूद बेटी को भी कुछ बताने से मना कर दिया गया। डर को और गहरा करने के लिए ठगों ने वीडियो कॉल पर रामचरितमानस पर हाथ रखवाकर कसम दिलवाई कि वे इस पूरे मामले की जानकारी किसी को नहीं देंगे। लगातार वीडियो कॉल और धमकियों के चलते दंपति मानसिक रूप से टूटते चले गए।

अगले चरण में ठगों ने ऑनलाइन कोर्ट पेशी का नाटक रचा। करीब तीन घंटे तक चली इस वीडियो कॉल में एक व्यक्ति डीएसपी बनकर और दूसरा खुद को मुंबई कमिश्नर, आईजी और बैंक अधिकारी बताकर बात करता रहा। इसी दौरान वीडियो कॉल पर ही आधार कार्ड, एटीएम कार्ड नंबर और अन्य निजी जानकारियां मांगी गई। ठगों ने कुछ कथित दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि ये सभी रिकॉर्ड मुंबई के कैनरा बैंक से जुड़े हैं।

डिजिटल अरेस्ट के दौरान आधार और एटीएम कार्ड की स्कैनिंग भी करवाई गई। ठगों ने इसे जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताया और भरोसा दिलाया कि इससे उन्हें निर्दोष साबित होने में मदद मिलेगी। लगातार डर और दबाव में दंपति ने हर निर्देश का पालन किया।

अगले दिन ठगों ने प्रेम सिंह कुशवाह को बैंक भेजा और RTGS के जरिए 29 लाख 50 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होते ही 24 घंटे के भीतर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। लेकिन जैसे ही पैसा ट्रांसफर हुआ वैसे ही रकम गुजरात के बड़ोदरा स्थित एक खाते से 20 अलग-अलग खातों में भेज दी गई। यहीं से दंपति को ठगी का एहसास हुआ।

घटना का पता चलते ही पीड़ित दंपति ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उनके बैंक खाते को होल्ड कराया और अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

एसडीओपी रविंद्र वास्कले ने बताया कि यह डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई गंभीर साइबर ठगी का मामला है। ठगों ने खुद को पुलिस और सरकारी अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपति से 29.50 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस बैंकिंग लेनदेन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

पुलिस ने आम नागरिकों से साफ अपील की है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। साथ ही उन्होंने किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, आधार, एटीएम या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।