बालाघाट। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट में बिरसा ब्लॉक के जगला गांव में बैगा आदिवासियों से मुलाकात की। यहां वे करीब एक घंटे रुके और बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों से मिले। इस दौरान राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बीमारी से निपटने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है।
राहुल गांधी ने बालाघाट में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा, 'यहां पर बहुत सारे बच्चों की मृत्यु कुपोषण बीमारी के कारण हुई है और जो समर्थन सरकार को देनी चाहिए चाहे वो स्वस्थ्य हो, शिक्षा हो या रोजगार की हो यहां पर सब बंद पड़ा हुआ है। ऐसा लग रहा है कि यहां पर मध्य प्रदेश सरकार है ही नहीं। इनकी जमीन का मुद्दा है, मनरेगा का मुद्दा है यहां पर कोई समर्थन नहीं दी जाती है। बहुत बच्चे मरे हैं लेकिन अभी तक आधे लोगों को मुआवजा दिया नहीं गया है। तो मैं सरकार को कहना चाहता हूं कि वो अपनी जिम्मेदारी पूरी करें...यहां के लोगों को स्कूल, अस्पताल दीजिए। विपक्ष की तरफ से मैं आपको कहना चाहता हूं कि इन्हें इनका हक दीजिए।'
राहुल गांधी ने आगे कहा, 'अगर आप दो योजना चल रहे हो तो इनको दोनो योजना का फायदा मिलना चाहिए। काफी दुख हुआ है यहां की स्थिति देखकर। हमने इनसे कहा कि हमारी सरकार जैसे ही आती है तो हम इनकी मदद करेंगे....लोकसभा में इनका ही नहीं बल्कि सारे आदिवासियों के साथ जो किया जा रहा है उनका मैं मुद्दा उठाऊंगा।' बता दें कि बालाघाट में पिछले 3 महीनों में कुपोषण और मलेरिया से 32 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। विपक्ष का दावा है कि मृतकों का असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है।
राहुल गांधी ने इस दौरान दावा किया कि यहां आदिवासी महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का पैसा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से आदिवासी क्षेत्रों में अस्पताल, बिजली और पानी की सुविधाएं देने की मांग की। राहुल ने कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर आदिवासियों की मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे आदिवासियों को ‘वनवासी’ नहीं, ‘आदिवासी’ कहते हैं।
राहुल गांधी गुरुवार को महाराष्ट्र के बिरसी एयरपोर्ट से दोपहर करीब 12 बजे सड़क मार्ग से रवाना हुए थे। वे रजेगांव, सालेटेगा, कोसमी बायपास से भरवेली, सोनेवानी, बिठली होते हुए ग्राम जगला पहुंचेंगे। उनका काफिला ग्राम माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल में रुका, जहां राहुल ने बच्चों से मध्याह्न भोजन पर बात की। यहां वे करीब 15 मिनट रुके और स्कूली स्टूडेंट्स से शिक्षा और अन्य मुद्दों पर चर्चा की।