मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठे सवालों के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन किया। दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, असम, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च और प्रदर्शन किए। पार्टी की प्रमुख मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों की स्वतंत्र जांच की है।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने SIR के मुद्दे को लेकर भोपाल सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन किया। भोपाल में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर पहुंचकर नारेबाजी की और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी राज्य निर्वाचन कार्यालय के घेराव और जिला स्तर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है।
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मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि यह मामला किसी एक राजनीतिक दल का नहीं बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा है। प्रदेश कांग्रेस ने SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। पार्टी की ओर से आगे भी विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सचिवालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका। जिसके बाद कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और पुलिस के साथ उनकी नोकझोंक हुई।
पटना में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारे लगाए। असम में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई को पुलिस ने हिरासत में लिया।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस विधायक पोस्टर लेकर पहुंचे। सदन में उन्होंने नारेबाजी की और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। दिल्ली में भी चुनाव आयोग के मुख्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई थी।
कांग्रेस का यह आंदोलन SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज हुई थी। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के भीतर विचार विमर्श और असहमति सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है तथा SIR समेत अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। इसमें SIR से जुड़े फैसलों, दिशानिर्देशों और कथित सॉफ्टवेयर बदलावों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की SIT जांच की मांग भी की गई है। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के SIR को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी दो याचिकाएं दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रक्रिया, संवैधानिक वैधता और SIR लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई है।
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कांग्रेस के अलावा कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने भी CEC की भूमिका और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए SIR पर दोबारा विचार करने की बात कही। वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और उठाए गए सवालों पर आयोग तथा CEC की जिम्मेदारी है कि वे अपना पक्ष जनता के सामने रखें। कांग्रेस के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए समयसीमा दी है। पार्टी ने कहा है कि यदि इस्तीफा नहीं दिया गया तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कांग्रेस ने शुक्रवार के प्रदर्शन के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने का भी ऐलान किया है। पार्टी के मुताबिक, 28 सितंबर को देशभर में जिला कांग्रेस कमेटियां जिला कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकालेंगी। कांग्रेस ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के साथ ही उनके कार्यकाल के फैसलों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रही है। मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस के अगले चरण के प्रदर्शन इसी अभियान का हिस्सा होंगे। ऐसे में SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
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