नई दिल्ली। चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष लगातार हमलावर है। कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली में वोट चोरी के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है, वहीं पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे पर साधु-संतों और बड़ी संख्या में लोगों के साथ उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने राम मंदिर ट्रस्ट में अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है।

जयराम रमेश ने इसे लोगों की आस्था के साथ धोखा करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट चुप्पी तोड़िए। देश जानना चाहता है कि चंदा चोर कौन हैं? भागीदार कौन-कौन हैं? उन्होंने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में निष्पक्ष जाँच क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि जब चेतावनियाँ आती रहीं, तो चोरियाँ कैसे चलती रहीं? इसका ज़िम्मेदार कौन है? बड़े चोरों को आज भी क्यों बचाया जा रहा है?

जयराम रमेश ने ऑडिट फर्म की सलाह को नजरअंदाज किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रस्ट बनने (5 फ़रवरी 2020) के कुछ महीनों बाद, नवंबर 2020 में एक प्राइवेट ऑडिट फ़र्म ने ट्रस्ट को “इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट” पर सलाह दी थी। फ़र्म ने साफ़ लिखा कि मैनेजमेंट “बहुत ही अनप्रोफ़ेशनल” है और किसकी क्या ज़िम्मेदारी है, यह तय नहीं है। दान का कोई सिस्टमैटिक रिकॉर्ड नहीं है, लेन-देन और डेटा एंट्री की दूसरी या तीसरी जाँच नहीं होती, हज़ारों कर्मचारी होने के बावजूद कोई HR डिपार्टमेंट नहीं है। बैंक रिकंसिलिएशन और अकाउंटिंग के लिए क्वालिफ़ाइड स्टाफ़ नहीं है और IT कंपनी के डेटा की सिक्योरिटी और वेरिफ़िकेशन का भी कोई इंतज़ाम नहीं है।

उन्होंने कहा कि ऑडिट फर्म ने चेतावनी दी थी कि अनप्रोफ़ेशनल स्टाफ़ और ख़राब डेटा मैनेजमेंट से गलत जानकारी और गुमराह करने वाली रिपोर्टिंग होगी। हर लेन-देन, डेटा और स्टाफ़ के लिए SOP बनाने और गहनों जैसे दान के लिए सही स्टॉक रजिस्टर रखने की सलाह भी दी गई थी। जयराम रमेश के मुताबिक, छह साल बाद भी SOP लागू नहीं हुए। उन्होंने दावा किया कि 2026 में सरकार द्वारा लीपापोती के लिए बनाई गई SIT ने भी माना कि गिनती वाले कमरे से 105 बार नकदी निकाली गई, जबकि कर्मचारी कैमरों के सामने खड़े होकर उन्हें ढक देते थे।

जयराम रमेश ने मंदिर निर्माण में कमीशनखोरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने चंपत राय को बताया कि ठेकों में 40% कमीशन लिया जा रहा है, फ़र्ज़ी मज़दूर (घोस्ट वर्कर) दिखाए जा रहे हैं और सामान बढ़ा-चढ़ाकर बिलों में चढ़ाया जा रहा है। वर्मा का कहना है कि कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही हटा दिया गया।

उन्होंने बेशकीमती दान की रसीदें जारी नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए। जयराम रमेश ने कहा कि जाँच में दर्जनों ऐसी बेशकीमती चीज़ें मिलीं, जिनके लिए दान देने वालों को रसीद तक जारी नहीं की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि जब ख़तरा 2020 में ही लिखकर बता दिया गया था, तो उस पर काम क्यों नहीं हुआ? शिकायत करने वाले को ही क्यों हटाया गया? श्रद्धालुओं के कीमती दान की रसीद तक क्यों नहीं काटी गई?

जयराम रमेश ने कहा, 'चोर चोरी करते रहे और आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोग ‘मैं भी चौकीदार’ कहकर लगातार सोते रहे। यह कोई संयोग नहीं हो सकता।' उन्होंने आगे कहा कि जिन्हें देव-द्रव्य की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी, यानी ट्रस्ट की निगरानी और चौकीदारी, सौंपी गई थी, उन्होंने जानबूझकर इस व्यवस्था को ऐसी हालत में क्यों रहने दिया, जिसमें चढ़ावे की रकम और कीमती दान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे? क्या यह सिर्फ़ लापरवाही थी या चोरों को संरक्षण दिया जा रहा था? किसे संरक्षण दिया गया और किन-किन बड़े लोगों की मिलीभगत या भागीदारी थी, इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

जयराम रमेश ने SIT की जाँच पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की जनता को इस जाँच पर भरोसा नहीं है। जब चेतावनियों, शिकायतों और CCTV में सामने आई 105 घटनाओं के बावजूद बड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर सवाल कायम हैं, तो केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से पूरा मामला कैसे समाप्त हो सकता है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच हो। ऑडिट की चेतावनियों, ठेकों में कथित कमीशनखोरी, पूरी हेराफेरी और बेशकीमती दान का पूरा हिसाब सामने आए। छह साल से चल रही चोरी का पूरा आंकड़ा और ब्यौरा सामने आए। हर जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका की जाँच हो और दोषियों को कानून के अनुसार सज़ा मिले। जयराम रमेश ने कहा कि राम के नाम पर आए चढ़ावे का हिसाब देश मांग रहा है और श्रद्धालुओं की आस्था किसी को भी जवाबदेही से बचने का अधिकार नहीं देती।