भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध तेज होने लगा है। देशभर के किसान संगठनों ने इस ट्रेड डील और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के विरुद्ध प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसान संगठन आगामी 10 मार्च को देशव्यापी विरुद्ध प्रदर्शन करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान पर आयोजित होने वाले इस विरोध प्रदर्शन का ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन किया है।
किसान नेताओं का कहना कि अगर इस तरह की ट्रेड डील लागू होती है तो बाहर से सस्ता अनाज देश में आएगा, जिससे भारतीय किसानों की फसल नहीं बिक पाएगी। किसान संगठनों ने कहा कि अमेरिका अपने किसानों को 100 प्रतिशत तक सब्सिडी देता है, जबकि भारत में किसानों को न तो कीटनाशक पर पर्याप्त सब्सिडी मिलती है और न ही खाद पर राहत दी जा रही है।
किसानों ने कहा कि पहले यूरिया की बोरी 50 किलो की होती थी, जिसे घटाकर 45 किलो और फिर 40 किलो कर दिया गया। किसान संगठन ने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए इसका विरोध किया। किसान नेताओं ने बताया कि 10 मार्च को सुबह 10 बजे किसान अपने-अपने ट्रैक्टर लेकर अनाज मंडियों में एकत्रित होंगे। इसके बाद किसान प्रदर्शन करते हुए तहसील कार्यालयों तक मार्च करेंगे और सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराएंगे।
शनिवार को जारी अलग-अलग बयानों में, किसान संगठनों ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ अमेरिका के साथ असमान आर्थिक व्यवस्थाओं के बारे में चिंताओं को उजागर करेगा। एसकेएम ने बताया कि इस दिन पंजाब के बरनाला जिले में किसानों की एक विशाल रैली होगी, साथ ही देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और रैलियां भी आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में किसानों, कृषि मजदूरों, श्रमिकों, व्यापारियों, छात्रों और महिला संगठनों के शामिल होने की उम्मीद है।
एसकेएम ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध ने मध्य पूर्व को सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में धकेल दिया है और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता पैदा कर दी है। किसान संगठन ने चिंता व्यक्त की कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव से भारत की अर्थव्यवस्था और खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।