नई दिल्ली। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) ने दुनियाभर में लाखों कर्मचारियों की नौकरियों पर असर डाला है। अब इसका प्रभाव भारत में भी दिखाई देने लगा है। देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों में शामिल इंडिया टुडे ग्रुप ने करीब 120 कर्मचारियों की छंटनी की खबर सामने आई है। इस छंटनी के पीछे AI आधारित वर्कफ्लो को तेजी से अपनाने की रणनीति को बड़ी वजह माना जा रहा है।

न्यूज़लॉन्ड्री ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि 20 जुलाई से 24 जुलाई के बीच इंडिया टुडे समूह के करीब 120 से ज्यादा कर्मचारियों के ऊपर कार्रवाई हुई। इनमें बड़ी संख्या आज तक हिंदी वेबसाइट से जुड़े कर्मचारियों की थी। इसके अलावा कैमरामैन, वीडियो एडिटर्स, ग्राफिक्स, फैक्ट-चेक, डाटा इंटेलिजेंस यूनिट, आज तक रेडियो और अन्य विभागों के कर्मचारी भी प्रभावित हुए।

रिपोर्ट में बताया गया है कि एचआर के कहने पर अधिकांश कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया। वहीं कुछ कर्मचारियों ने कारण जानने की कोशिश भी की। हालांकि, उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसके साथ कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने इस्तीफा देने से इनकार किया। ऐसे में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।

न्यूज़लॉन्ड्री के मुताबिक जिन्होंने इस्तीफा दिया उन्हें दो महीने की पूरी सैलरी एडवांस में दी गई। वहीं, जिन्हें टर्मिनेट किया गया है, उन्हें दो महीने का बेसिक वेतन दिया जाना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह इस्तीफा एचआर प्लेटफॉर्म ‘केका’ के माध्यम से लिया गया। यह एक थर्ड-पार्टी सर्विस है, जिसका इस्तेमाल कंपनियां अपने ह्यूमन रिसोर्स से संबंधित सेवाएं मैनेज करने के लिए करती हैं। इस प्लेटफॉर्म पर इस्तीफे के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध होते हैं। कर्मचारियों ने अपनी स्थिति के अनुसार अलग-अलग विकल्प चुने।

न्यूज़लॉन्ड्री का दावा है कि जिन कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है उनमें से कुछ एक-दो साल से काम कर रहे थे तो कुछ बीते 14-15 सालों से यहां जुड़े थे। इसके अलावा हाल ही में ज्वाइन करने वाले भी इस छंटनी का हिस्सा बने। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ कर्मचारी के हवाले से बताया गया है कि कंपनी घाटे में भी चल रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कंपनी का सालाना नेट प्रॉफ़िट 81 फीसदी गिरकर लगभग 14 करोड़ रुपये रह गया। साथ ही कंपनी का रेवेन्यू 19 प्रतिशत गिरकर लगभग 807 करोड़ रुपये हो गया।

फिलहाल, इंडिया टुडे ग्रुप की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि निकाले गए कर्मचारियों की जगह AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में अमेजन, मेटा, IBM और इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियों ने भी लागत घटाने और AI पर निवेश बढ़ाने की रणनीति के तहत बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की है।