भोपाल। कर्नाटक सरकार में गृह मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही को लेकर सरसंघचालक मोहन भागवत को लिखे गए पत्र ने एक बार फिर उन महत्वपूर्ण प्रश्नों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिन्हें वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह जी वर्षों से उठाते रहे हैं। ये प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं। 

दिग्विजय सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजीयन, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय, कर अनुपालन तथा संगठनात्मक जवाबदेही के संबंध में उन्होंने 22 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को विस्तृत पत्र लिखकर जांच एवं पारदर्शिता की मांग की थी। इस पत्र में उन्होंने प्रश्न उठाया था कि जब देश की अन्य संस्थाओं, ट्रस्टों, समितियों, स्वयंसेवी संगठनों तथा राजनीतिक दलों पर वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन के नियम लागू होते हैं, तो करोड़ों रुपये के लेन-देन और विशाल संगठनात्मक संरचना वाले RSS पर वही मानक क्यों लागू नहीं होने चाहिए। 

सिंह ने 5 वर्ष पूर्व प्रेषित पत्र में नागपुर के आर.टी.आई कार्यकर्ता मोहनीश जबलपुरे के हवाले से कहा था कि कोविड के दौरान आर.एस.एस ने 7 करोड़ से अधिक खाने के पैकेट और एक करोड़ राशन के थैले वितरित किए थे। यह करोड़ों रुपए किस मद से खर्च किया गया था, इस पत्र का आज तक कोई जवाब नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि इसके पश्चात 12 नवंबर 2025 को उन्होंने स्वयं सरसंघचालक मोहन भागवत को पत्र लिखकर उनके उस वक्तव्य पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने RSS के अपंजीकृत होने की तुलना हिंदू धर्म से की थी। सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि सनातन धर्म और RSS की तुलना करना उचित नहीं है तथा किसी भी संगठन को हिंदू धर्म का पर्याय नहीं माना जा सकता। उन्होंने संघ की कानूनी स्थिति, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय, कर दायित्वों और संगठनात्मक जवाबदेही से जुड़े अनेक प्रश्न भी उठाए थे। इस पत्र के बाद भी मोहन भागवत ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया था ।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि आज प्रियंक खड़गे ने भी लगभग वही प्रश्न उठाए हैं जिन्हें वे लंबे समय से सार्वजनिक रूप से उठाते रहे हैं। यह किसी व्यक्ति या संगठन के विरोध का विषय नहीं है, बल्कि संविधान के समक्ष समानता, कानून के शासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही का विषय है।

उन्होंने कहा कि यदि देश के लाखों ट्रस्ट, स्वयंसेवी संगठन, धार्मिक संस्थाएँ, सोसायटी, कंपनियाँ और राजनीतिक दल अपने वित्तीय स्रोतों तथा आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत करते हैं, तो देश के सबसे बड़े और प्रभावशाली संगठन होने का दावा करने वाले RSS से भी यही अपेक्षा स्वभाविक है। लोकतंत्र में कोई भी संस्था प्रश्नों और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती।

सिंह ने पुनः आग्रह किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना पंजीयन कराते हुए कानूनी स्थिति, संगठनात्मक संरचना, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय तथा कर अनुपालन संबंधी जानकारी सार्वजनिक कर देश के समक्ष पूर्ण पारदर्शिता का उदाहरण प्रस्तुत करे। यही लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और सार्वजनिक जीवन की शुचिता के अनुरूप होगा।