राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को सौंप दिया गया है। जोशी पहले से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय जुड़ने के बाद उनके पास कुल चार अहम जिम्मेदारियां हो गई हैं।
प्रल्हाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से भाजपा सांसद हैं और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance-ISA) के अध्यक्ष भी हैं। शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद केंद्र सरकार में उनकी भूमिका और व्यापक हो गई है।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दो पन्नों के 575 शब्दों वाले पत्र के माध्यम से दिया था। उन्होंने पत्र में दो बार इस बात का उल्लेख किया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए पद छोड़ रहे हैं कि देश के युवा भ्रम के जाल में न फंसें।
साल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने व्यापक सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दिया है। इससे पहले साल 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने इस्तीफा दिया था। हालांकि, उनका इस्तीफा वैश्विक #MeToo अभियान के दौरान उन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद हुआ था।
दूसरी ओर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत डिपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि मंत्री के इस्तीफे के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि लोग कहते थे इस सरकार में मंत्री इस्तीफा नहीं देते लेकिन आंदोलनकारियों ने इसे संभव कर दिखाया।
डिपके ने कहा कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं। उन्होंने छात्र आत्महत्या के मामलों में मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने की मांग दोहराई।
दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए डिपके ने कहा कि पुलिस ने कॉकरोच से टक्कर ली है और आंदोलनकारियों ने एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा दिलवाकर अपनी ताकत दिखाई है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती।