नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सरकारी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण फैसला आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बच्चों के बेहतर शैक्षणिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। इसलिए सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना पूरी तरह अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिव्यू पिटीशनों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर शैक्षणिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का TET पास करना जरूरी है। हांलाकि, कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को एक बड़ी राहत भी दी है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए योग्यता प्राप्त करने की समय सीमा 1 साल के लिए बढ़ा दी है।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह फैसला सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के इन-सर्विस शिक्षकों पर लागू होगा। जिन राज्यों में अब तक पुराने शिक्षकों को TET से छूट मिली हुई थी, वहां भी अब यह आदेश प्रभावी माना जाएगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए परीक्षा पास करने की समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी है। अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करने का मौका मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समीक्षा के अधीन आदेश में कोई त्रुटि नहीं है और याचिकाकर्ता राहत पाने के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने माना कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा प्रभावित होने से शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, लेकिन बच्चों का हित सर्वोपरि है। कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवहारिक भी होना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए सीमित राहत देते हुए TET पास करने की समय-सीमा 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि TET परीक्षा साल में कम से कम दो बार आयोजित की जाए। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। साथ ही स्पष्ट कर दिया कि अब आगे कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही सभी रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य रखने का फैसला बरकरार रखा। इससे पहले 1 सितंबर 2025 के आदेश में कोर्ट ने दो साल के भीतर पात्रता परीक्षा पास करने को कहा था। अब इसमें एक साल की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि TET सिर्फ नौकरी की शर्त नहीं, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की संवैधानिक आवश्यकता है।