नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी जंग और आसन्न ऊर्जा संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार सार्वजनिक बयान दिया है। पीएम मोदी ने सोमवार को संसद में कहा कि यह तनाव खत्म होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि बातचीत से ही समस्या का समाधान है। इस दौरान पीएम मोदी ने देशवासियों को अलर्ट करते हुए कहा कि इस युद्ध का असर लंबा चल सकता है। ऐसे में हमें कोरोना संकट की तरह तैयार रहना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद को संबोधित करते हुए कहा, 'युद्ध शुरू होने के बाद से 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं। ईरान से अब तक लगभग 1,000 भारतीय सुरक्षित लौट चुके हैं, जिनमें से 700 से अधिक मेडिकल छात्र हैं। स्थिति को देखते हुए, सीबीएसई ने खाड़ी देशों के स्कूलों में कक्षा 10 और 12 की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और छात्रों की शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और कई आवश्यक वस्तुएं होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से भारत आती हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद, हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित न हो।'

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'जैसा कि हम सभी जानते हैं, देश अपनी एलपीजी आवश्यकता का 60 फीसदी आयात करता है। आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण, सरकार ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। साथ ही, एलपीजी का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास भी किए जा रहे हैं। देशभर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है।' पीएम मोदी ने आगे कहा कि ईरान-इजरायल जंग का असर लंबा चल सकता है। हमें कोरोना संकट की तरह तैयार रहना होगा। हमें तैयार रहना होगा और एकजुट रहना होगा, हम कोरोना के समय भी ऐसी चुनौती का सामना कर चुके हैं। हालांकि, हम भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक उपाय भी तलाश रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'प्रभावित देशों में स्थित हमारे दूतावास लगातार भारतीयों की सहायता में लगे हुए हैं। चाहे वहां काम करने वाले भारतीय हों या वहां गए पर्यटक, सभी को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। हमारे दूतावास नियमित रूप से सलाह जारी कर रहे हैं। भारत और अन्य प्रभावित देशों में चौबीसों घंटे चलने वाले सहायता कक्ष और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं। इनके माध्यम से सभी प्रभावित लोगों को नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। संकट के समय में भारत और विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि है।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है। बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है। भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं। युद्ध के बाद से ही हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके बावजूद हमारी सरकार का प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो। इस पर हमारा फोकस रहा है।