दीपावली सफाई का त्यौहार है। स्वच्छ राजधानी भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्वच्छता के पर्व पर हर ओर कचरा बिखरा दिखाई दिया। यहां तक की धनतेरस को भी कॉलोनी सहित मुख्य बाजारों में भी सफाई नहीं हुई। शाम होते-होते बात बनी और मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हो गई। हड़ताल खत्म होने से ज्यादा वायरल वह वीडियो हुआ जिसमें कलेक्टर प्रियंक मिश्र सड़क की सफाई कर रहे हैं। वे महापौर मालती राय के साथ बाजार में पहुंचे थे। एक तरह से, कलेक्टर प्रियंक मिश्र और महापौर मालती राय ने प्रतीक रूप से सफाई कर शहर में सफाई कर्मचारियों के लौट आने की घोषणा की। लेकिन कलेक्टर और महापौर का यह कार्य ही दिखावा करार दिया गया।
ज्यों ही सफाई करते हुए कलेक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कमेंट हुए कि अब तो हड़ताल खत्म हो गई है अब झाड़ू उठाने का क्या लाभ? अफसर और नेता दिखावे की रस्म करने उतर आए। अगर सफाई को लेकर इतनी ही गंभीरता थी तो नेताओं और अफसरों का तब सड़क पर उतरना था जब सफाई कर्मचारी हड़ताल पर थे और पूरा शहर में कचरा फैला हुआ था। कमेंट तो यह भी हुए कि सोशल मीडिया पर हम भी चौकीदार लिखने वाले भी सफाई करने सड़क पर नहीं उतरे। जब मंत्री कृष्णा गौर से कर्मचारी संगठनों ने चर्चा कर ली और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सफाई कर्मचारी संगठन से मुलाकात में मांगें मान ली तब श्रेय का संघर्ष शुरू हो गया।
एक और आईपीएस ने नौकरी छोड़ी, सागर ही बदनाम
साल 2026 में मध्यप्रदेश के दूसरे आईपीएस अनुराग सुजानिया ने इस्तीफा दे दिया है। इसके पहले सागर के ही एसपी रहे 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने भी जनवरी 2026 में सरकारी सेवा से अलग होने का फैसला किया था। अभिषेक तिवारी ने साइबर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने के लिए वीआरएस लिया था। अभिषेक तिवारी और अनुराग सुजानिया के मामलों में एक समानता सागर जिले से जुड़ी है। दोनों वहां एसपी रह चुके हैं। तिवारी के कार्यकाल के दौरान स्कूल की दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत की घटना के बाद उन्हें सागर से हटाया गया था।
वहीं, सुजानिया के कार्यकाल में सितंबर 2026 में बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतों का मामला सामने आया था। इसके बाद 27 अक्टूबर को उन्हें सागर एसपी के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल में एआईजी बनाया गया। महज चार दिन बाद 2 नवंबर को उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से त्यागपत्र देने की बात कही है लेकिन माना जा रहा है कि वे किसी बड़ी कंपनी को जॉइन करेंगे। एक वर्ष में दो आईपीएस के नौकरी छोड़ देने पर भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में युवाओं की अरूचि तथा अफसरों पर राजनीतिक दबाव जैसे मुद़दों पर बहस जारी है। माना जा रहा है कि शराब से मौत या अन्य आपराधिक मामलों के कारण अफसरों पर कार्रवाई तो हो जाती है मगर अपराधियों के नेटवर्क को संरक्षण देने वाले राजनेताओं पर कार्रवाई नहीं होती है। इस राजनीतिक संरक्षण के कारण ही अफसरों का प्रशासिनक सेवा से मोह भंग हो रहा है।
किसके निशाने पर हैं एसीएस संजय दुबे
प्रशासनिक गलियारे में प्रदेश के 2 सीनियर आईएएस का तबादला संभावित माना जा रहा है। इनमें से एक नाम नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे हैं। बीते कुछ दिनों से सीनियर आईएएस संजय दुबे को लेकर दो वीडियो वायरल हुए। एक वीडियो में वे नगरीय प्रशासन विभाग में खरीदी के दौरान की जाने वाली गड़बड़ी का खुलासा करते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के बाद विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष ने बीजेपी सरकार को घेर लिया। आईएएस संजय दुबे से भी सवाल हुए कि विभाग के मुखिया होने के नाते संजय दुबे से भी उम्मीद की गई कि वे भ्रष्टाचार बंद करने के लिए ठोस कदम उठाएं। यह वीडियो पुराना है। इसके दोबारा वायरल होने की टाइमिंग को देख कर माना गया कि पुराना वीडियो वायरल करवाने का उद्देश्य संजय दुबे को टारगेट करना था।
इसके कुछ दिनों बाद एक वीडियो और वायरल हुआ। इंदौर में आयोजित 'अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने विभाग के अपर मुख्य सचिव और 1993 बैच के आईएएस संजय दुबे के भाषण और आत्मविश्वास की तारीफ करते हुए कहा कि वे रिटायरमेंट के बाद एक अच्छे नेता बन सकते हैं। इस टिप्पणी को भी एक कमेंट की तरह देखा गया। इन दो मामलों के बाद माना जा रहा है कि संजय दुबे की जिम्मेदारी में जल्द बदलाव होगा।
हलक का दारोगा वाले आईपीएस बालाघाट के एसपी
हलक का दारोगा नामक व्यंग्य पुस्तक लिखने वाले आईपीएस मलय जैन को बालाघाट का नया एसपी बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें सेनानी, हॉक फोर्स बालाघाट का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। हॉक फोर्स प्रदेश में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और अभियान संबंधी जिम्मेदारियां निभाती है। बालाघाट में तत्कालीन एसपी के तबादले के नौ दिन बाद नया पुलिस मुखिया पदस्थ किया गया है। इस कारण मलय जैन से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। बचपन से साहित्य में रूचि रखने वाले मलय जैने के अध्ययन के दौरान ही दो उपन्यास प्रकाशित हो गए थे। बाद में वे व्यंग्य लिखने लगे।
अपनी पुस्तक हलक का दारोगा में बाबू व्यवस्था पर उन्होंने लिखा है कि रकम, जमीन गिरवी रखवाकर उधार देना, सूद उगाहना, उगाही-उगाही के खेल में बरतन भांडे भी बिकवा देना ही नहीं, कपड़े तक उतरवा लेने के लिए जाने जाते थे गिरवी बाबू। वे अपनी पुस्तक में पटवारी व्यवस्था पर गहरा कटाक्ष कर चुके हैं। उनसे उम्मीद है कि नक्सल मुक्त हुए बालाघाट में साहित्य की संवेदना के साथ नए कार्यों को अंजाम देने की अगुवाई करें।