मध्यप्रदेश के प्रशासनिक हलके में यह सप्ताह बड़े बदलावों वाला रहा। कुछ माह से जारी ऊहापोह खत्म हुआ और केंद्र सरकार के आदेश के बाद आख़िकार आईएएस अनुराग जैन की दिल्ली वापसी हो गई। उन्हें नीति आयोग का सीईओ बनाया गया है। आदेश जारी होते ही उनकी विदाई भी हो गई।
आईएएस अनुराग जैन दिल्ली से ही भोपाल आए थे और लगभग दो वर्ष का कार्यकाल वर्षों से लंबित कर्मचारियों के प्रमोशन हो जाने जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि, कुछ प्रशासनिक सख्ती और कुछ सीएम के साथ खटपट के लिए जाना जाएगा।
माना जाता था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त अफसरों में शुमार होने वाले आईएएस अनुराग जैन का होना मोहन सरकार पर दिल्ली की नजर का होना था। यही वजह रही कि कार्यकाल के आरंभ से लेकर बहुत बाद तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच सबकुछ ठीक नहीं दिखाई दे रहा था। यहां तक कि कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के पास रहने वाली मुख्य सचिव की कुर्सी को भी दूर करवा देना इस खींचतान का नतीजा माना गया। ऐसी भी खबरें मिली थी कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुछ फैसलों का सीएस अनुराग जैन ने रोक दिया था। बाद में दोनों के बीच बर्फ पिघलती दिखाई दी और तालमेल बनता नजर आया। फिर भी सीएस अनुराग जैन ने अपनी तरह से प्रशासनिक सख्ती बना कर रखी। खासकर, कलेक्टर सहित अन्य प्रशासनिक नियुक्तियों में उनका वीटो काम करता था।
आईएएस अनुराग जैन को मिला एक्सटेंशन अगस्त में खत्म हो रहा था। इसबीच कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें और एक्सटेंशन देकर दिल्ली बुला लिया जाएगा। ऐसा हुआ भी। अनुराग जैन के जाने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पसंद के अफसर अशोक वर्णवाल को मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया गया है। यानी, अब सीएम डॉ. मोहन यादव प्रशासिनक फैसले भी स्वतंत्रता से ले सकेंगे। उनके फैसलों पर दिल्ली का सीधा नियंत्रण नहीं होगा। आखिर, चले गए थानेदार अनुराग जैन, अब डर काहे का?
रिटायर होने के पहले मंत्रालय से बाहर हुए राजेश राजौरा
सफलता से महज एक छोटा कदम दूर रहते अरमानों का टूट जाना क्या होता है यह आईएएस राजेश राजौरा को देख कर जाना जा सकता है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के सबसे सीनियर आईएएस में से एक डॉ. राजेश राजौरा के मुख्य सचिव न बन पाने की भी अपनी कहानी है। अक्टूबर 2024 में ऐसा वक्त था जब उनके सितारे बुलंद थे। वे नए मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव के विश्वासपात्र थे।
सीएम की टीम के लीडर डॉ. राजेश राजौरा को लेकर यह विश्वास हो गया था कि वे मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव बनाए जाएंगे। तत्कालीन मुख्य सचिव वीरा राणा के रिटायरमेंट की दोपहर तक सबकुछ राजेश राजौरा के पक्ष में था। बताया गया कि बाहर जाने के पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उन्हें अग्रिम बधाई दे चुके थे। राजेश राजौरा के सीएस बनने की उम्मीद में मिठाईयां बांट दी गई थी। यकायक मौसम बदला और दिल्ली ने फैसला बदल दिया। राजेश राजौरा के बदले दिल्ली में पदस्थ आईएएस अनुराग जैन को मुख्य सचिव बनाकर भोपाल भेज दिया गया। केंद्र का यह फैसला जितना आईएएस राजेश राजौरा के लिए कष्टप्रद था, उतना ही सीएम मोहन यादव के लिए भी झटका देने वाला था।
उस वक्त कयास लगाया गया था कि आईएएस अनुराग जैन की विदाई के बाद अनुभव तथा मुख्यमंत्री से करीबी होने के कारण मुख्य सचिव पद के लिए राजेश राजौरा का दावा ही मजबूत होगा। लेकिन इस बार भी किस्मत ने साथ नहीं दिया। तब सीनियर आईएएस अनुराग जैन के कारण मुख्य सचिव की कुर्सी हाथ में आने से रह गई थी तो इस बार राजेश राजौरा से जूनियर अफसर आईएएस अशोक वर्णवाल को मुख्य सचिव बना दिया गया। इसबार तो खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ही राजेश राजौरा को झटका दिया है।
मंत्रालय में उनसे जूनियर आईएएस अशोक वर्णवाल बतौर मुख्य सचिव पद संभालते ही राजेश राजौरा की मंत्रालय से विदाई हो गई। वे प्रशासन अकादमी के महानिदेशक बनाए गए हैं। यानी, रिटायर वे भले कुछ दिनों बाद होंगे लेकिन मंत्रालय से तो उनकी विदाई हो गई है। इस विदाई के पीछे के कारणों कीपड़ताल की जा रही है कि आखिर राजेश राजौरा से कहां चूक हो गई? तमाम तर्कों के बीच इस आकलन में भी दम है कि शुरुआत में दिखाई गई हाईपर एक्टिविटी ही उनके मार्ग की सबसे बड़ी बाधा बन गई है जबकि लो प्रोफाइल रहने वाले अफसरों ने हमेशा ही छुपे रूस्तम की तरह चौका मारा है।
महिला कलेक्टरों पर भारी बीजेपी नेताओं की नाराजगी
नए सीएस अशोक वर्णवाल ने कार्यभार संभालते ही जब पहली प्रशासिनक सर्जरी की तो इस बदलाव में इस बात की चर्चा ज्यादा हुई कि मैदानी पोस्टिंग वाली महिला आईएएस को बीजेपी नेताओं की नाराजगी के कारण हटा दिया गया है। शनिवार रात जारी सूची में छह जिलों के कलेक्टर बदले गए। इनमें तीन महिला आईएएस भी हैं। मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग और आगरमालवा कलेक्टर प्रीति यादव से कलेक्टरी छिन ली गई जबकि रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह को शहडोल में कलेक्टर बना कर भेजा गया है।
रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह की कार्यप्रणाली से स्थानीय बीजेपी नेताओं में असंतोष था। जबकि अदिति गर्ग के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने मंदसौर में बीजेपी नेताओं को नेतागिरी करना भूला दिया था। मंदसौर का स्थानीय मीडिया कड़क अंदाज़, बेबाक कार्यशैली और कलेक्टोरेट में 'नो नेतागिरी' का बोर्ड लगाने वाली कलेक्टर अदिति गर्ग को 'दबंग' लेडी आईएएस का दर्जा दिया है। इस तबादले के बाद से ही चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया है कि 'क्या नेताओं की बात न सुनना और काम में ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति ही मैडम के ट्रांसफर की वजह बन गई है? तबादले की खबरों पर लोग कमेंट कर रहे हैं कि चलो, अब माननीय राहत की सांस लेंगे और नए कलेक्टर को खूब फोन घुमाएंगे!
क्या एमपी को मिलगी पहली महिला डीजीपी
मध्यप्रदेश में मुख्य सचिव बदल गए हैं। प्रशासनिक मुखिया के बदल जाने के बाद अब पुलिस मुखिया को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाणा का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। पुलिस मुख्यालय ने जेल डीजी वरुण कपूर, होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा एवं ईओडब्ल्यू डीजी उपेंद्र जैन समेत 11 आइपीएस के नामों का एक प्रस्ताव गृह विभाग को भेज दिया है। गृह विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव की जांच कर जानकारी यूपीएससी को भेजा जाएगा। यूपीएससी तीन नामों का पैनल तैयार करेगा जिनमें से एक डीजीपी नियुक्त होगा।
11 नामों के पैनल में 1991 बैच के वरुण कपूर, प्रज्ञा ऋचा और उपेंद्र जैन का नाम है। ये तीनों नाम वरिष्ठता के क्रम में हैं। वहीं साल 1992 बैच के पंकज श्रीवास्तव, आदर्श कटियार, जी अखेतो सेमा और 1993 बैच के अनिल कुमार, रवि गुप्ता आदि के नाम शामिल है। यदि मोहन सरकार ने महिला सशक्तीकरण को तवज्जो दी तो होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा का डीजपी बनना तय है। वे प्रदेश की पहली महिला डीजीपी होंगी। साथ ही चर्चा यह भी है कि वर्तमान डीजीपी को छह माह एक्सटेंशन दे कर सरकार उन्हें वर्तमान सुधार कार्य जारी रखने का मौका दे सकती है।