मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार हर साल दिसम्बर में गुड गवर्नेंस को उत्सव की तरह मनाती है। गुड गवर्नेंस यानी सुशासन। शिवराज सिंह चौहान हों या डॉ. मोहन यादव, दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने काबिल अफसरों को गांव में भेजा। वहीं रात रुकने के निर्देश दिए ताकि सुशासन गांव तक पहुंच सके। मगर हाल यह है कि किसान बेहाल हैं। उन्हें बार-बार सड़क पर उतरना पड़ रहा है। मालवा के किसान उज्जैन में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ उतरे तो हरदा-नर्मदापुरम के किसान मूंग की सरकारी खरीदी, खाद वितरण में ई टोकन व्यवस्था समाप्त हो, पर्याप्त बिजली और भावांतर योजना खत्म करने की मांग को लेकर भोपाल पहुंचे।
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी एक बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। किसान मुख्यमंत्री निवास के बिल्कुल करीब तक पहुंच गए थे। आंदोलन का नेतृत्व बीजेपी से जुड़ा संगठन भारतीय किसान संघ कर रहा था। इस बार किसान राजनीतिक चेहरे के साथ नहीं थे। उनके प्रदर्शन के दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार में खींचतान उजागर हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना के बीच पत्र लिखे गए।अंतत: सरकार को अपनी नीति बदलनी पड़ी।
यहां से सवाल उठता है कि शासन प्रणाली से जनता का भरोसा क्यों घटता जा रहा है? सुशासन लालफीताशाही, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। किसान आंदोलन भोपाल तक नहीं पहंचता यदि सीएम से मुलाकात का वक्त तीन बार तय कर टाल नहीं दिया जाता। उजागर हुआ कि केंद्र की बैठकों में प्रदेश के कृषि मंत्री या विभाग के अफसर शामिल नहीं होते थे। इस पर किसान नेता केदार सिरोही लिखते हैं कि किसानों देख रहे हो? कैसी सरकार चल रही हैँ? आखिर कौन सरकार चला रहा हैँ? मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का 45 प्रतिशत और रोजगार में 60 प्रतिशत योगदान दे रही हैँ।
किसान आंदोलन बिना हिंसक हुए, संवाद का रास्ता हमेशा खुला रख कर तथा राजनीति से बच कर सफल हुआ। किसान किसी राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा नहीं बने लेकिन प्रशासन की पोल खुल गई कि वह न बेहतर नीति बना पाया और न किसानों के मुद्दों को समझ पाया। सवाल यह है कि गुड गवर्नेंस में ऐसी नीतियां बनाई हो क्यों जाती है जिन्हें बदलना पड़े?
महिला आईपीएस मोनिका शुक्ला की तस्वीर दूसरा पहलू
किसान आंदोलन की तमाम तस्वीरों के बीच आईपीएस मोनिका शुक्ला का वीडियो भी वायरल हुआ। आमतौर पर शांत अफसरों में शुमार होने वाली मोनिका शुक्ला इस वीडियो में अलग अंदाज में नजर आईं। बस बैरिकेड को तोड़ कर आगे बढ़नों को तत्पर किसानों को देख वे आगे आईं और बस के सामने खड़ी हो गईं। बाद में मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर शहर के अन्य हिस्से में जाने का प्रयास कर रहे थे, जबकि मुख्य पुलिस बल दूसरी दिशा में तैनात था। मौके पर तीन-चार पुलिसकर्मी ही थे। शहर की कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से बचाने के लिए ही उन्हें बस के सामने खड़ा होना पड़ा।
आईपीएस मोनिका शुक्ला की यह तस्वीर प्रशासन का दूसरा पहलू है। प्रशासन का एक चेहरा है जो कमरे में नीतियां बनाता है और दूसरा चेहरा वह है जो मैदान में कानून-व्यवस्था संभालता है। भोपाल में हुए किसान आंदोलन के दौरान हरदा, नर्मदापुरम् में जिला प्रशासन ने चाहे जैसा बर्ताव किया हो लेकिन राजधानी के प्रशासन ने संयमित कदम रखे। इसका कारण दतिया में होने वाला मतदान भी था। अगर किसानों पर सख्ती होती तो बीजेपी को नुकसान का भय था। इसलिए प्रशासन ने बिल्कुल भी बल प्रयोग नहीं किया। किसानों को जैसे-तैसे रोकने के तरीकों के कारण ही अकेली महिला आईपीएस मोनिका शुक्ला को बस के आगे खड़ा हो जाना पड़ा।
अफसरों के आगे हारे गए बीजेपी एमएलए
गुना के बीजेपी एमएलए पन्नालाल शाक्य जिले में जारी भ्रष्टाचार से हार गए हैं। यह बात उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है। गुना में आयोजित तेजस कार्यशाला के मंच से उन्होंने खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और अधिकारियों की मनमानी के आरोप लगाए। विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि खनिज विभाग अवैध उत्खनन करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय जरूरत के लिए रेत या बजरी खरीदने वाले किसानों और आम लोगों को परेशान कर रहा है।
उन्होंने एक मामले में पहले जिला खनिज अधिकारी से बात की, लेकिन अधिकारी ने जुर्माना हटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने एसडीएम से संपर्क किया। एसडीएम ने भी कहा कि जुर्माने की रसीद काट दी गई है। विधायक पन्नालाल शाक्य ने कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से बात की। कलेक्टर ने फोन करने का आश्वासन दिया, लेकिन काफी देर तक कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि विभाग जुर्माने के नाम पर अवैध वसूली कर रहा है। पूरा चोरपना अधिकारी ही करवा रहे हैं।
विधायक पन्नालाल शाक्य के निशाने पर केवल खनिज विभाग ही नहीं रहा, बल्कि उन्होंने एसडीएम और कलेक्टर की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए। विधायक और कलेक्टर के बीच में पिछले कुछ समय से दिखाई दे रही तनातनी इस कार्यक्रम में भी उजागर हुई जब विधायक पन्नालाल शाक्य और कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल एक साथ मंच पर नजर नहीं आए। कलेक्टर पहले पहुंचे और औपचारिकता पूरी कर रवाना हो गए। इसके बाद विधायक कार्यक्रम में पहुंचे।
महिला डीएसपी पाकसाफ, ड्राइवर ही दोषी?
डीएसपी नेहा पच्चीसिया एक बार फिर से चर्चा में हैं। वे तब भी चर्चा में आई थीं जब एयर होस्टेस के बाद पुलिस सर्विस में सलेक्शन हुआ था। उसके बाद कोरोना काल में उनका कामकाज सराहा गया था। इस कार्य के लिए सम्मानित होने वाली डीएसपी नेहा पच्चीसिया पर एक ट्रांसपोर्टर ने अवैध वसूली का आरोप लगाया है। 22 जुलाई को ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र कुमार जैन ने एसपी से शिकायत कर आरोप लगाया था कि वाहन चेकिंग के दौरान उनकी गाड़ी को रोककर सीएसपी ने 30 हजार रुपए की मांग की। 25 हजार रुपए मौके पर नकद लिए गए जबकि शेष 5 हजार रुपए अगले दिन ड्राइवर के माध्यम से मंगवाए गए।
इस शिकायत पर कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने प्रारंभिक जांच के बाद कॉन्स्टेबल और ड्राइवर केशव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही पूरे मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य को सौंप दी गई। डीएसपी नेहा पच्चीसिया से तीनों थाने का प्रभार वापस ले लिया गया। इस कार्रवाई के बाद शिकायतकर्ता महेंद्र जैन अपनी शिकायत से पलट गया है। उसका कहना है कि ड्राइवर ने मैडम के बारे में मुझे झूठी जानकारी दी। इसके आधार पर मैंने शिकायत की। अब मैं कोई कार्रवाई नहीं चाहता हूं। मतलब, पैसे लेने के आरोप में ड्राइवर फंसा हुआ है और डीएसपी मैडम पाकसाफ हैं। पुलिस की जांच के बाद मामले का पटाक्षेप हो ही जाएगा।