मध्यप्रदेश के सबसे ज्यादा समय तक सीएम रहे शिवराज सिंह चौहान का पद बदला है। वे मुख्यमंत्री नहीं है लेकिन सरकार तो बीजेपी की है और जब वे अपनी सरकार और अफसरों से नाराजगी जताते हुए धरने पर बैठ जाते हैं तो बात उतनी आसान नहीं रह जाती है। सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने और उनकी फसल नष्ट करने से शिवराज सिंह चौहान इतने व्यथित हुए कि उन्होंने इसे सरासर 'अन्याय' करार दिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद कहा कि यहां जो कुछ हुआ, वह बेहद दुखद है। मैंने सालों पहले अधिकारियों से कहा था कि इन परिवारों को परेशान न किया जाए, क्योंकि वे लंबे समय से यहां रह रहे हैं। इनके वोट से सरकार बनी है। यह कहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने चेताया कि आदिवासियों को परेशान करने का असर पूरे प्रदेश पर होगा। 

आदिवासी और महिलाएं बीजेपी के दो कोर वोटर हैं। शिवराज ने पहला हमला आदिवासियों को लेकर किया तो दूसरा हमला लाड़ली बहना योजना को लेकर किया। रायसेन में आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम के दौरान भाषण देते केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर सरकार को लाड़ली बहना जैसी योजनाएं जारी रखनी पड़ेंगी। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि योजना की राशि कितनी बढ़नी चाहिए। इस पर महिलाओं ने 3000 करने की आवाज लगाई। शिवराज ने जवाब दिया कि तीन हजार बढ़ेंगे धीरे-धीरे। ये योजना मुख्यमंत्री जी ने जारी रखी है और हर सरकार को जारी रखनी पड़ेगी। सबको पता है कि बहनें गुस्सा हो गईं तो फिर खैर नहीं है। 

शिवराज सिंह चौहान ने यह तब कहा जब एक कार्यक्रम में दिया गया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह बयान चर्चा में आया था कि आपको अंदाज़ा नहीं है कि लाड़ली बहना योजना कितनी खर्चीली साबित हुई है। मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि मुख्यमंत्री बनने पर इतना भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा।
सीएम मोहन यादव द्वारा मजाकिया अंदाज में की गई इस टिप्पणी पर शिवराज ने चेता दिया कि बहनें गुस्सा हो गई तो क्या होगा। यह बात ओर है कि आदिवासी मामले पर भी जितने आक्रामक शिवराज सिंह चौहान दिखाई दिए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उतने ही शांत रहे। पत्रकारों के सवाल पर डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आदिवासी समाज की झोपड़ियां गिराने की जांच करवा ली जाएगी। जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मतलब, प्रशासन शिवराज की नाराजगी दूर करने का प्रयास नहीं करेगा बल्कि अपनी कार्रवाई को सही सिद्व करेगा। जाहिर है, शिवराज सिंह चौहान के आक्रामक रूख पर सीएम की ठंडी प्रतिक्रिया का राजनीतिक असर तो होगा। संभव है कि आनेवाले समय में किसी और मुद्दे पर अटैक होगा। 

हेमंत खंडेलवाल के दौरों का राज

मध्यप्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के करीब सवा साल बाद हेमंत खंडेलवाल प्रदेश के दौरे पर हैं। जिस तेजी से वे क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं उसे देखते हुए बीजेपी की अंदरूनी राजनीति की दिशा और दशा का अंदाजा लगाया जा रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने बिप्लव कुमार देब को प्रदेश प्रभारी तथा रेखा वर्मा को सह प्रभारी नियुक्त किया है। दोनों नेताओं ने प्रदेश में कोर ग्रुप की बैठक की तो आपसी टकराव के मामले खुल कर सामने आ गए। इसबीच संगठन महामंत्री की लंबे समय से खाली पोस्ट भी भर दी गई है। संघ की पृष्ठभूमि के चंद्रशेखर को नया प्रदेश संगठन महामंत्री बनाया गया है। इन नियुक्तियों के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विंध्य सहित मालवा का दौरा किया है। वे जल्द ही बालाघाट सहित अन्य क्षेत्रों में भी जाने वाले हैं। 

असल में प्रदेश अध्यक्ष की सक्रियता का राज सतह पर आया वर्चस्व का संघर्ष है। हर माह किसी न किसी अंचल से नेताओं के आपसी टकराव की खबरें आ जाती हैं। ऐसे मामलों में प्रदेश नेतृत्व नेताओं को भोपाल बुलाकर समझाइश या जरूरत के अनुसार हिदायतें देता रहा हैं। इस बार बात कोर ग्रुप की बैठक तक पहुंच गई। जाहिर है, कमरा बैठकों से लेकर मैदान तक एक संदेश देना जरूरी है और इसी संदेश को देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जगह-जगह जा रहे हैं। मैदान में जारी वर्चस्व की लड़ाई को देखते हुए हेमंत खंडेलवाल का यह दौरा सुधार और समझाइश की कवायद है। तभी तो इंदौर दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पद से पहले भी जीवन था और पद के बाद भी रहेगा। पद हमेशा किसी के पास नहीं रहता, इसलिए किसी को भी पद का घमंड नहीं करना चाहिए। यदि आचरण नहीं बदला, तो इतिहास माफ नहीं करेगा। 

कांग्रेस का अपना एसआईआर

मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और वोट चोरी को ले कर दिल्ली में प्रदर्शनी कर रही कांग्रेस मध्यप्रदेश में अपना एसआईआर चलाने वाली है। प्रदेश कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में 33 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसमें लगभग 20 लाख नामों को स्थायी रूप से स्थानांतरित की श्रेणी में डालकर हटाया गया है। तय किया गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। यदि मतदाता मौके पर मौजूद मिलता है और उसका नाम काट दिया गया है तो उसका नाम फिर से सूची में जुड़वाने के लिए फॉर्म भरवाया जाएगा। सभी 71 हजार बूथों की रिपोर्ट तैयार कर चुनाव आयोग के सामने रखी जाएगी। कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन कार्य 1 नवंबर से करेंगे। 

इस कवायद के साथ पार्टी अपनी टीम का पुनरीक्षण कार्य भी करने वाली है। दतिया चुनाव के बाद से यह कार्य लंबित है। बताया जाता है कि पहले प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर नई टीम बनाने पर विचार किया गया था। लेकिन तर्क दिया गया कुछ नेता अच्छा कार्य कर रहे हैं उन्हें हटाया जाना ठीक नहीं होगा। जो अपेक्षाओं पर खरे नहीं हैं उन नेताओं को हटाने से ही सही संदेश जाएगा। इस तर्क के बाद पूरी टीम बदलने की जगह प्रदर्शन के आधार पर बदलाव पर सहमति बनी है। यानी प्रदेश कांग्रे संगठन और मैदान में अगले कुछ दिनों में अलग तरह की सक्रियता देखने को मिल सकती है। 


बुरे फंसे नरोत्तम मिश्रा

पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर चर्चा में है। इस बार भी चर्चा उनके फंसने की है। खासबात यह है कि इस बार वे किसी राजनीति समीकरण में नहीं फंसे हैं बल्कि ग्वालियर में लिफ्ट में फंसे थे। डॉ. नरोत्तम मिश्रा एक कोचिंग सेंटर का उद्घाटन करने के लिए ग्वालियर पहुंचे थे। गजेंद्रगंज में तीसरे माले पर स्थित कोचिंग सेंटर तक पहुंचने के दौरान लिफ्ट अचानक बंद हो गई। पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा अपने समर्थकों के साथ उसमें फंस गए।

मुख्य अतिथि के लिफ्ट में फंसे होने की जानकारी मिलते ही लोग जमा हो गए। कुछ देर बाद उन्हें किसी तरह से लिफ्ट से निकाला गया गया है। इसके बाद वे कार्यक्रम में शामिल हुए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को लेकर दिलचस्प कमेंट किए।