शराबबंदी को लेकर कुछ बरस पहले पत्थर उठा चुकी पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जहरीली शराब कांड के बाद पत्थर तो नहीं उठाया लेकिन चोट तो करारी की है। उन्होंने यह चोट भी तब की जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुलाकात करने के लिए उनके घर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से करीब 40 मिनट बंद कमरे में मुलाकात के बाद उमा भारती ने कहा कि यह शुद्ध रूप से भाई-बहन की मुलाकात थी। उमा भारत ने जब मुख्यमंत्री से मुलाकात की बात कही तो डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वे स्वयं मिलने आ रहे हैं।
बंद कमरे में क्या बात हुई यह तो बाहर नहीं आई लेकिन मीडिया से बात करते हुए उमा भारती ने बीजेपी सरकार के मंत्रियों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों पर निशाना साधा। उमा भारती ने कहा कि सागर अवैध शराब बिक रही थी तब वहां, के मंत्री, विधायक और अन्य जन प्रतिनिधि क्या कर रहे थे? उन्होंने तब ध्यान क्यों नहीं दिया? नेताओं के साथ उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारी भी तय की। उमा भारती ने कहा कि यदि बंडा में अवैध शराब को लेकर जनप्रतिनिधियों ने समय रहते पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में मामला पहुंचाया था, तो पुलिस अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उमा भारती ने पुलिस अधीक्षक की जवाबदेही का सवाल उठाकर एक तरह से सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने आरोपियों के मकान गिराए जाने पर भी पूछा कि अगर ये अवैध निर्माण थे तो जब बड़ी इमारतें खड़ी हो रही थीं, तब प्रशासन क्या कर रहा था?
उमा भारती ने साफ कहा कि बंडा में अवैध शराब एक समस्या है और यदि वहां यह समस्या है तो शिवपुरी उसका समाधान है जहां महिलाएं शराब दुकान के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनका स्वास्थ्य ठीक होता तो वह शिवपुरी में महिलाओं के साथ खड़ी होतीं। उमा भारती बीते कुछ समय पहले शराबबंदी मुहिम को चला चुकी है। ऐसे में अवैध शराब से मौत पर बीजेपी नेताओं और प्रशासन की भूमिका पर उनका सवाल उठाना केवल रस्मअदायगी नहीं है। इस बार उमा भारत के हाथ में पत्थर नहीं है मगर उनके बयान ने बीजेपी नेताओं की जवाबदेही तय करते हुए कुछ सवाल उठाए हैं। तीखे बयान ने चोट तो गहरी की है।
क्या धर्म संसद मैनेज कर पाएगी छात्रों की गूंज?
यह सप्ताह मध्यप्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित सप्ताह होने वाला है। 19 सितम्बर को इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों की गूंज कार्यक्रम होगा तो उसके एक दिन पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत उज्जैन में युवा धर्म संसद में युवाओं को संबोधित करेंगे। इस दौरान मालवा में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का दौरा प्रस्तावित है।
आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 17 और 18 सितंबर को उज्जैन में रहेंगे। 17 सितंबर को वे महाकाल परिसर के पास अरविंद नगर में उज्जैन महानगर के स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। 18 सितंबर को सुबह 11 बजे देवास रोड स्थित गीता भवन में सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से आयोजित ‘युवा धर्म संसद’ में भागवत युवाओं से संवाद करेंगे। इसमें राष्ट्र, समाज, संस्कृति और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का दौरा तय नहीं है लेकिन मंदसौर, इंदौर और उज्जैन में तीन प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। योजना है कि उनकी उपस्थिति में ग्रामीण आबादी को जमीन का मालिकाना हक देने वाली स्वामित्व योजना से जुड़े कार्यक्रम, मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को छोड़ने का आयोजन हो। इसके साथ उज्जैन में पीएम मोदी के जन्मदिन की शाम प्रस्तावित दीपोत्सव में उनकी भागीदारी हो।
19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस बेहद उत्साहित है। एक लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन की सूचना के साथ इस आयोजन को भव्य बनाने की तैयारी है। ऐसे में बीजेपी यह जरूर कह रह है कि संघ प्रमुख तथा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आयोजनों का राहुल गांधी की यात्रा से कोई साम्य नहीं है लेकिन इन तीनों आयोजनों की टाइमिंग राजनीति चर्चाओं का जन्म दे रही है। दिल्ली में जेन जी आंदोलन के बाद यह दूसरी बार होगा जब संघ प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करेंगे। ऐसे में इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले बीजेपी और संघ की सक्रियता के चलते तीनों आयोजनों के उद्देश्य और सफलता की तुलना होना स्वाभाविक है। इसीलिए सवाल कायम है कि क्या धर्म संसद में युवा भागीदारी छात्रों की गूंज का असर कम कर पाएगी?
ओवैसी का विरोध और भोपाल की संस्कृति
एआईएमआईएस प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का मंगलवार को भोपाल आए हैं। ओवैसी का कार्यक्रम उनके भाषणों के कारण हमेशा चर्चाओं में रहता है। इसी आशंका के चलते ओवैसी के भोपाल दौरे से पहले ही प्रदेश की सियासत गरमा गई। ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने पुलिस और प्रशासन को पत्र लिखकर ओवैसी के कार्यक्रम को मंजूरी नहीं देने की मांग की थी। उनका डर है कि जिस तरह के बयानों के लिए ओवैसी जाने जाते हैं वे भोपाल में भी कुछ ऐसा कह सकते हैं जिससे भोपाल की फिजा बिगाड़ सकती है। इस आशंका का कारण ओवैसी की यात्रा का कारण और त्यौहार का मौका है।
ओवैसी यूसीसी के विरोध के लिए भोपाल आए हैं। वे कार्यकर्ताओं से मुलाकात के अलावा मंगलवार शाम को सभा को संबोधित करने वाले हैं। उनके कहे का समर्थकों में जितना असर होगा, उससे ज्यादा प्रतिक्रिया विरोधी खेमे से आएगी। यही कारण था कि ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी का एक धड़ा चाहता था कि प्रशासन ओवैसी के कार्यक्रम की अनुमति ही न दे ताकि न बांस रहे न बांसुरी बजे। अब जब सभा की अनुमति मिल गई है तो नजरें इस बात पर टिकी है कि ओवैसी क्या और कैसा बयान देते हैं। उनके कहे पर निर्भर करेगा कि ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी की आशंका कितनी सच थी।
दिल्ली में एमपी बीजेपी, आखिर हुआ क्या?
तैयार रहिए, प्रदेश में ऐसा कुछ होने वाला है कि सब चौंक जाएंगे। प्रदेश की राजनीति में ऐसे कयास और इन कयासों के संभावित परिणामों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। ये कयास बिना किसी आधार के नहीं लगाए जा रहे हैं। कयासों का बाजार मध्य प्रदेश के नेताओं की दिल्ली दौड़ के कारण लगाए जा रहे हैं।
बीते सप्ताह अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और शिवप्रकाश से मुलाकात की थी। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल की भी शाह से मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी दिल्ली में कई नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। 11 सितंबर को अधिकांश नेताओं के दिल्ली होने को नेतृत्व परिवर्तन या कैबिनेट विस्तार से जोड़ कर देखा गया।
इन यात्राओं का देख माहौल ऐसा है कि प्रदेश में कुछ बड़ा होने वाला है मगर सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। बीजेपी ने जिस तरह से चौंकाने वाले फैसले लिए हैं, उस प्रथा का देखते हुए खुद नेता भी असमंजस में हैं कि हाईकमान क्या फैसला लेता है। नेताओं के समर्थक पत्रकारों और अन्य जानकारों से टोह ले रहे हैं, मुलाकातें हुई, बातें हुई, इन सबका आखिर हुआ क्या?