अमेरिका के लिए अब जंग मुश्किल होती जा रही है। ट्रंप के साथ कोई देश नहीं खड़ा है। तेल के खेल में दुनिया के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ईरान है कि झुकने या रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में अब ट्रंप के तेवर और कड़े होते जा रहे हैं। अब डोनाल्ड ट्रंप ने तेल खरीदने को लेकर दुनिया के तमाम देशों को दो विकल्प दिए हैं।
उन्होंने कहा, 'जो भी देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की वजह से जेट फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, जैसे कि सऊदी अरब, जिसने ईरान को खत्म करने की मुहिम में शामिल होने से इनकार कर दिया था। उनके लिए मेरे पास एक सुझाव है: पहला, US से खरीदें, हमारे पास इसकी कोई कमी नहीं है। दूसरा, थोड़ी हिम्मत जुटाएं स्ट्रेट तक जाएं और बस उसे ले लें।'
ट्रंप ने आगे कहा कि अब आपको यह सीखना पड़ेगा कि खुद के लिए लड़ाई कैसे लड़ी जाती है। अमेरिका अब आपकी और मदद नहीं करेगा। जैसे कि आपने हमारी नहीं की। ईरान, असल में पूरी तरह तबाह हो चुका है। मुश्किल काम हो चुका है। जाओ, अपना तेल खुद ले लो।
दूसरी ओर, अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान जल्द ही समझौता कर लेगा। डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ दिखावा नहीं करते, ना ही वह पीछे हटते हैं। ईरान के नए शासन को अब तक यह बात समझ लेनी चाहिए। शासन में बदलाव हो चुका है। यह नया शासन पिछले शासन से ज्यादा समझदार होना चाहिए। ट्रंप समझौता करने को तैयार हैं, और इसकी शर्तें उन्हें पता हैं। अगर ईरान तैयार नहीं है, तो अमेरिका का रक्षा विभाग और भी ज्यादा जोर-शोर से अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
वहीं, ईरान ने कहा है कि अमेरिका पर उसका भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं और उस पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी डील से पीछे हट चुका है, इसलिए अब किसी नई बातचीत पर भरोसा नहीं है। अराघची ने साफ किया कि अमेरिका के साथ सहयोगी देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जरूर हो रहा है, लेकिन इसे बातचीत नहीं कहा जा सकता।
हालांकि इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध अगले 2 से 3 हफ्तों में खत्म हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपना लक्ष्य हासिल कर चुका है और ऑपरेशन लास्ट स्टेज में है। मंगलवार रात व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। यह अब पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि समझौता होने पर युद्ध पहले भी खत्म हो सकता है।