वाशिंगटन। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। मिडटर्म चुनाव में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। ट्रंप ने भी आखिरकार अपनी हार मान ली है और कहा है कि वह नतीजों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अमेरिका में सीनेट भारत की राज्यसभा जैसी संसद का उच्च सदन है। जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स भारत की लोकसभा जैसी संसद का निचला सदन है। डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन इन दोनों सदनों में हार गई है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं और सभी सीटों पर चुनाव हुए हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 231 सीटें जबकि ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 144 सीटें जीती हैं।
इसके अलावा सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 33 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। बाकी 2 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। इन नतीजों को मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं।
गवर्नर की बात करें तो कुल 36 सीटों में से 31 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। 20 डेमोक्रेट्स और 11 रिपब्लिकन ने सीटें जीती हैं। 5 राज्यों में वोटों की गिनती जारी है। अमेरिकी चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद बाजार में यह अनिश्चितता बढ़ी है कि ट्रम्प ईरान युद्ध को लेकर आगे क्या फैसला लेंगे। इसी चिंता का असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमत 76 सेंट यानी 0.7% बढ़कर 104.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव नतीजों पर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिकी चुनाव नतीजों पर कहा कि अमेरिकी जनता ने साफ संदेश दिया है कि वह युद्ध नहीं चाहती। लोगों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज और रोजी-रोटी की चिंता को ध्यान में रखते हुए युद्ध के खिलाफ वोट दिया है। हम जनता के इस फैसले का समर्थन करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिकी सरकार दूसरे देशों के दबाव में आकर अपनी ही जनता की इच्छा के खिलाफ जाती है, तो उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
ट्रम्प ने मिडटर्म चुनाव में हार के लिए फॉक्स न्यूज की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि चैनल ने लगातार डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं को अपने कार्यक्रमों में जगह दी, जिससे रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान हुआ। ट्रम्प ने न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर बिल डी ब्लासियो को चैनल पर बुलाए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने डी ब्लासियो को न्यूयॉर्क के इतिहास का सबसे खराब मेयर बताया।
बता दें कि मिडटर्म चुनाव में हार के बाद ट्रंप को राष्ट्रपति पद से नहीं हटाया जाएगा। वे दो साल का कार्यकाल पूरा कर सकते हैं। लेकिन अमेरिकी संसद में उनकी पकड़ कमजोर होगा। इसके अलावा, डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संसदीय जांच शुरू करने, सरकारी खर्च और बजट से जुड़े फैसलों को प्रभावित करने तथा प्रशासन पर दबाव बनाने का मौका मिलेगा। यह हार उनकी पार्टी के राजनीतिक प्रभाव और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के लिहाज से बड़ा झटका साबित हो सकती है।