इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे वाले इंदौर में दूषित पेयजल ने भयावह संकट का रूप ले लिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीले पानी से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह इलाज के दौरान 62 वर्षीय लक्ष्मी रजक की मौत हो गई। इसके साथ ही दूषित पानी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इससे पहले मंगलवार को उल्टी-दस्त से पीड़ित पूर्व पहलवान खूबचंद पुत्र गन्नुदास की मौत हो गई थी। 

ताजा मामला लक्ष्मी रजक का है जो भागीरथपुरा की दूध वाली गली की निवासी थी। परिजनों के अनुसार उन्हें अचानक घबराहट और पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीएचएल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अवधेश गुप्ता के मुताबिक जांच में उनकी किडनी में गंभीर संक्रमण पाया गया था। संक्रमण तेजी से शरीर में फैल चुका था। जिसकी वजह से शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। तमाम कोशिशों के बावजूद मंगलवार रात उनकी मौत हो गई। 

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इससे एक दिन पहले मंगलवार को भागीरथपुरा निवासी 75 वर्षीय खूबचंद पुत्र गन्नुदास ने भी दम तोड़ दिया था। वे पिछले करीब 15 दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित थे। परिजनों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां दवाइयां देकर घर भेज दिया गया था। हालत में सुधार न होने पर मंगलवार सुबह दोबारा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया लेकिन शाम होते-होते तेज उल्टियों के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही समय में उनकी मौत हो गई। 

खूबचंद बंधोनिया पूर्व पहलवान थे। वे अखाड़े में कई नामी पहलवानों को पटखनी दे चुके थे और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते थे। परिवार का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से सीवरेज मिला पानी सप्लाई हो रहा है जिसकी कई बार शिकायत की गई थी लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का कहना है कि दूषित पानी के कारण उन्हें अपने मजबूत और स्वस्थ पिता को खोना पड़ा।

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खूबचंद की मौत के बाद बुधवार सुबह परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद लोग अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।

भागीरथपुरा में दिसंबर के अंतिम सप्ताह से उल्टी-दस्त और जलजनित बीमारियों के मामले सामने आने शुरू हुए थे। तब से अब तक क्षेत्र में 4,000 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से करीब 450 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। फिलहाल 10 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं जबकि दो मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। लगातार हो रही मौतों से इलाके में दहशत का माहौल है और लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं।

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घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में पानी की नियमित जांच के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही दूषित जल आपूर्ति के कारणों की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता करेंगे। आयोग चार सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जिसमें दूषित पानी के स्रोत, जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के उपायों पर निष्कर्ष दिए जाएंगे।