भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार साल 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मना रही है, लेकिन कृषि विभाग खुद ही गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल 14,537 स्वीकृत पदों में से 8,468 पद खाली हैं। यानी लगभग 60 फीसदी पद रिक्त पड़े हुए हैं। फिलहाल सिर्फ 6,126 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं। स्टाफ की किल्लत के बीच कृषक कल्याण वर्ष मनाए जाने पर किसान नेता केदार सिरोही ने सवाल खड़े किए हैं।
कृषि अर्थशास्त्री और किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के लिए कृषक कल्याण वर्ष हैं, वही कृषि मंत्री के लिए यह स्वयं के कल्याण का वर्ष है। मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री को विभाग को सुचारु चलाने की चिंता नहीं है, क्योंकि उन्होंने एक लोकेंद्र राठौर नामक एक व्यक्ति को स्व कल्याण के लिए नियुक्त किया है, जो पूरी इंडस्ट्री से हिसाब-किताब जमा कर रहे हैं।
सिरोही ने कहा कि जिस विभाग मे 60 फीसदी पद खाली हो और वो विभाग प्रदेश की अर्थव्यस्था की रीढ़ हो तों बाकी आप समझ सकते हैं। कृषि मंत्री एंदल सिंह ने भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। कृषि इंडस्ट्री को लोकतंत्र की जगह राजतंत्र की फीलिंग आ रही हैं। भाजपा का चाल चरित्र और चेहरा सिर्फ शोषण करना है।
बता दें कि मध्य प्रदेश में कृषि विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों के 182 स्वीकृत में से 113 पद खाली हैं, जिनमें अपर, संयुक्त और उप संचालक जैसे पद हैं। वहीं वर्ग 1 , वर्ग 2 और 3 में भी बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जैसे मैदानी पद भी लगभग 60 फीसदी खाली हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फसल नुकसान सर्वे, सॉइल हेल्थ और नमो ड्रोन दीदी जैसी प्रमुख योजनाएं भी इससे प्रभावित रही हैं।
इसके अलावा बड़े कृषि संस्थाओं जैसे कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में भी 1065 में से 557 , बीज -फार्म विकास निगम में 14 में से 5, जैविक प्रमाणीकरण संस्था में 23 में से 8 , कृषि विस्तार प्रशिक्षण में 49 में से 27 पद खाली हैं। मंडी बोर्ड में भी लगभग 40 फीसदी पद खाली हैं। विभाग में रिक्त पदों के बीच कृषक कल्याण वर्ष मनाए जाने पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।