मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली 19 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी ने 20 मई को नागपुर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अब सामने आए उसके सुसाइड नोट ने परिवार और आसपास के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। नोट में उसने लिखा कि उसे पहले परीक्षा में अच्छे अंक आने की उम्मीद थी लेकिन दोबारा होने वाली परीक्षा में सफलता की कोई गारंटी नहीं है। उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। परिजनों का आरोप है कि नीट 2026 परीक्षा के पेपर लीक और उसके बाद परीक्षा रद्द होने की खबर से वह गहरे सदमे में चली गई थी।

आकांक्षा मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली थी और डॉक्टर बनने का सपना लेकर नागपुर में नीट की तैयारी कर रही थी। परीक्षा देकर लौटने के बाद वह काफी उत्साहित थी। परिवार के मुताबिक, उसे विश्वास था कि इस बार उसका चयन हो जाएगा लेकिन जैसे ही परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक की खबरें सामने आई वैसे ही उसका आत्मविश्वास टूटने लगा।

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मामला तब चर्चा में आया जब कुछ दिन पहले कांग्रेस के नेता पीड़ित परिवार से मिलने उनके गांव पहुंचे। इसके बाद घटना की जानकारी व्यापक रूप से सामने आई। गांव के बाहरी हिस्से में स्थित परिवार के घर में आज भी शोक का माहौल है। परिवार के सदस्य बताते हैं कि आकांक्षा पढ़ाई में बेहद मेधावी थी और उसने अपने माता-पिता की उम्मीदों को हमेशा समझा था।

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि परीक्षा के बाद बेटी ने फोन पर बताया था कि उसका पेपर बहुत अच्छा गया है और वह बेहद खुश थी। लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद वह मानसिक रूप से टूट गई थी। पिता का कहना है कि उसे लगने लगा था कि उसकी मेहनत बेकार हो गई।

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परिवार की आर्थिक स्थिति भी आकांक्षा के मन पर दबाव बना रही थी। कृष्ण कुमार लंबे समय से नागपुर में कुक का काम करते हैं। वे हृदय रोग से पीड़ित हैं और उन्हें तीन बार हार्ट अटैक आ चुका है। इलाज में पहले ही काफी पैसा खर्च हो चुका था। इसके बावजूद बेटी की पढ़ाई जारी रखने के लिए परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लिया और रिश्तेदारों से उधार भी लिया। परिजनों के अनुसार, आकांक्षा की पढ़ाई और कोचिंग पर करीब 15 लाख रुपए का कर्ज हो चुका था।

आकांक्षा के चाचा दद्दी प्रसाद ने बताया कि वह बचपन से ही पढ़ाई में तेज थी और डॉक्टर बनने के लिए लगातार मेहनत कर रही थी। परिवार में उसके अलावा छोटा भाई राज है जो वर्तमान में नौवीं कक्षा में पढ़ता है। चाचा के अनुसार, परीक्षा के बाद आकांक्षा खुश थी लेकिन पेपर लीक की खबरों के बाद उसने लोगों से मिलना जुलना कम कर दिया था। वह कम खाने लगी और अक्सर चुप रहने लगी। उसे यह चिंता सताने लगी थी कि यदि परीक्षा दोबारा हुई तो परिवार तैयारी और खर्च का बोझ कैसे उठाएगा।

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घटना वाले दिन यानी 20 मई को घर के सभी सदस्य अपने अपने काम पर गए हुए थे। दोपहर में आकांक्षा ने अपने कमरे में सीलिंग फैन से फंदा लगाकर जान दे दी। परिवार को करीब साढ़े तीन बजे घटना की जानकारी मिली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। रात होने के कारण उसी दिन पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। अगले दिन 21 मई को पोस्टमॉर्टम किया गया और 22 मई को उसका शव गांव लाया गया जहां अंतिम संस्कार किया गया।

घटना के बाद कई राजनीतिक और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि परिवार से मिलने पहुंचे। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने परिजनों से मुलाकात की और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से फोन पर उनकी बात कराई। उमंग सिंघार ने परिवार को हर संभव आर्थिक और कानूनी सहायता का भरोसा दिया।

वहीं, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े और प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे सहित कई नेताओं ने भी गांव पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। संगठन की ओर से परिवार को तत्काल ढाई लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। साथ ही परिवार पर चढ़े कर्ज को चुकाने में सहयोग का आश्वासन भी दिया गया है।

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