नई दिल्ली। देश के दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह छापेमारी फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के उल्लंघन से जुड़ी एक जांच के सिलसिले में हुई है। ईडी के अधिकारी वेदांता के विभिन्न दफ्तरों में दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगाल रहे हैं और कार्रवाई अभी भी जारी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह छापेमारी अभियान दिल्ली, राजस्थान और कई अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थित कंपनी के परिसरों में चलाया गया। ED के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई फेमा (FEMA) के दीवानी प्रावधानों (civil provisions) के तहत कथित उल्लंघन को लेकर शुरू की गई है, जिसमें फंड ट्रांसफर और विदेशी लेन-देन से जुड़ी गड़बड़ियां शामिल हैं।
ED की इस कार्रवाई पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए वेदांता समूह के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। प्रवक्ता ने कहा, 'कंपनी अधिकारियों को पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है और मांगी जा रही सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रही है। हमारा समूह सभी लागू कानूनों और नियमों के अनुपालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चूंकि यह मामला अभी नियामक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए हम इस चरण पर आगे कोई टिप्पणी करने में असमर्थ हैं।'
वेदांता लिमिटेड आज भारत की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय माइनिंग, मेटल्स, ऑयल और गैस कंपनियों में से एक है। यह कंपनी जिंक, एल्युमीनियम, कच्चा तेल और लौह अयस्क का उत्पादन करती है। कंपनी अपने बिजनेस को अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों में बांटने (Demerger) की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इस साल बेटे की मौत के बाद अनिल अग्रवाल ने अपनी 75 फीसदी संपत्तियों का इस्तेमाल सामाजिक कार्यों में लगाने का ऐलान किया था।
अनिल अग्रवाल और गौतम अडानी के बीच बड़ा कॉरपोरेट विवाद भी चल रहा है। मार्च 2026 के अंत में, अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर यह दावा किया था कि वेदांता को दिवालिया हो चुकी कंपनी 'जयप्रकाश एसोसिएट्स' (Jaypee Group) की संपत्तियों को खरीदने के लिए लिखित पुष्टि मिल चुकी थी। वेदांता ने इस बिड (बोली) को जीत लिया था। हालांकि, बाद में इस फैसले को कथित तौर पर पलट दिया गया और यह डील अडानी समूह के पक्ष में चली गई।
इस फैसले से असंतुष्ट होकर वेदांता समूह ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वेदांता ने करीब $4 बिलियन (लगभग ₹14,500 से ₹16,000 करोड़) मूल्य की इन संपत्तियों के लिए अडानी समूह की समाधान योजना पर रोक लगाने की मांग की है।
वेदांता का आरोप है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स के लेनदारों (CoC) ने प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती। कंपनी का दावा है कि नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर वेदांता की ₹12,505.85 करोड़ की बोली सबसे ऊंची (Highest Bid) थी, जबकि अडानी समूह की कुल बोली मूल्य के हिसाब से कम थी। हालांकि यह डील आश्चर्यजनक तरीके से अडानी के पक्ष में गई। इसके खिलाफ अनिल अग्रवाल ने न्यायालय का रुख किया है।
अडानी समूह से विवाद के बाद से अनिल अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में वेदांता समूह के छत्तीसगढ़ स्थित एक प्लांट में ब्लास्ट हुआ था। इस हादसे में कुछ श्रमिकों की जान भी गई थी। घटना के बाद कारोबारी अनिल अग्रवाल ने पीड़ितों के लिए तत्काल उचित मुआवजे का ऐलान किया था। इसके बावजूद इस मामले में अनिल अग्रवाल के विरुद्ध FIR दर्ज की गई। नवीन जिंदल समेत अन्य कई उद्योगपतियों ने इस कार्रवाई को अनुचित बताया था। अब अनिल अग्रवाल की वेदांता प्रवर्तन निदेशालय के निशाने पर है।