मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य शासन ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया है। यह आयोग हादसे के कारणों, जिम्मेदार अधिकारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच करेगा तथा तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से रविवार को जारी अधिसूचना में बताया गया कि आयोग का गठन जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा-3 के तहत किया गया है। आयोग को पांच प्रमुख बिंदुओं पर जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिनमें हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना, दोषी व्यक्तियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना, बचाव और राहत कार्यों की समीक्षा करना तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाना शामिल है।
गौरतलब है कि 30 अप्रैल को जबलपुर स्थित बरगी डैम में एक क्रूज डूब गया था। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में 8 महिलाएं, 4 बच्चे और एक पुरुष शामिल थे। घटना के बाद लगातार करीब 60 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। जिसके बाद सभी शव पानी से बाहर निकाले जा सके थे।
सरकार ने आयोग को प्रदेश में संचालित सभी नौकाओं, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट करने के भी निर्देश दिए हैं। आयोग यह भी जांच करेगा कि इन गतिविधियों में इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की गाइडलाइन का पालन हो रहा था या नहीं। साथ ही भविष्य में सुरक्षित संचालन के लिए एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने और पर्यटन व जल परिवहन क्षेत्रों में क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित करने की व्यवस्था पर भी सुझाव दिए जाएंगे।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर पहुंचकर दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया था और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में कार्रवाई करते हुए क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं समाप्त कर दी थी। वहीं, होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को निलंबित किया गया। जबकि, रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच शुरू की गई।
दूसरी ओर हादसे को लेकर जबलपुर की अदालत भी सख्त रुख अपना चुकी है। 6 मई को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डीपी सूत्रकार की अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए क्रूज पायलट और स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि पायलट को क्रूज संचालन की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद हादसे के दौरान वह यात्रियों को डूबता छोड़कर खुद सुरक्षित बाहर निकल गया।
कोर्ट ने इसे भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 106 और 110 के तहत अपराध माना था। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि यदि इस तरह की घटनाओं में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी लापरवाही के ऐसे मामले दोहराए जा सकते हैं और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।